Cover of ये है मेरी नारियाँ
Prathmanuyog

ये है मेरी नारियाँ

Yeh Hai Meri Naariyaan

by Dr. Hukamchand Bharill

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

ये हैं मेरी नारियाँ (Ye Hai Meri Naariyaan)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'ये हैं मेरी नारियाँ' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक उपन्यास (Novel) है। यह अंतिम केवली जम्बूस्वामी के जीवन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग पर आधारित है। इस पुस्तक का शीर्षक उन आठ सुंदर रानियों की ओर संकेत करता है जो जम्बू कुमार को संसार में रोकने का प्रयास करती हैं, और जम्बू कुमार का उनके प्रति आध्यात्मिक उत्तर क्या होता है।


2. मुख्य कथानक और पात्र (Plot & Characters)

  1. जम्बू कुमार का वैराग्य: जम्बू कुमार का विवाह आठ अत्यंत रूपवती कन्याओं के साथ हुआ था। उनके पिता और रानियाँ चाहते थे कि वे संसार के सुख भोगें, लेकिन जम्बू कुमार के हृदय में दीक्षा लेने का दृढ़ संकल्प था।
  2. विद्युच्चर चोर: जिस रात जम्बू कुमार का विवाह हुआ, उसी रात विद्युच्चर नामक प्रसिद्ध चोर उनके महल में चोरी करने आया। वह जम्बू कुमार और उनकी रानियों के बीच हो रहे संवाद को छिपकर सुनता है।
  3. संवाद शैली: पूरी पुस्तक जम्बू कुमार, उनकी रानियों और विद्युच्चर के बीच हुए संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है। रानियाँ उन्हें काम-भोग और संसार की सुंदरता का लालच देती हैं, जबकि जम्बू कुमार उन्हें आत्मा की सुंदरता और मोक्ष के सुख का तर्क देते हैं।
  4. हृदय परिवर्तन: जम्बू कुमार के उपदेशों का ऐसा प्रभाव पड़ता है कि न केवल रानियाँ बल्कि वह चोर (विद्युच्चर) भी वैराग्य धारण कर लेता है।

3. पुस्तक का आध्यात्मिक मर्म (Key Insights)

  • काम-विजेता: यह पुस्तक सिद्ध करती है कि असली वीरता युद्ध जीतने में नहीं, बल्कि अपनी इंद्रियों और वासनाओं को जीतने में है।
  • अध्यात्म और उपन्यास का मेल: डॉ. साहब ने दार्शनिक सिद्धांतों (जैसे अनित्यता, अशरण और अन्यत्व भावना) को एक कहानी के रूप में पिरोया है, जिससे यह युवाओं के लिए अत्यंत रोचक बन गई है।
  • सुख की खोज: जम्बू कुमार के माध्यम से यह समझाया गया है कि बाहरी "नारियाँ" या वैभव सुख का कारण नहीं हैं, बल्कि अपनी "चेतना" में लीन होना ही सच्चा सुख है।

4. निष्कर्ष

यह उपन्यास पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में उन चीजों से सुख पा रहे हैं जिन्हें हम अपना मानते हैं? यह संसार से विरक्ति और आत्मा में अनुराग जगाने वाली एक श्रेष्ठ कृति है।


5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: सरल, प्रवाहमयी और तार्किक हिंदी।
  • उपयोगिता: युवाओं और गृहस्थों के लिए प्रेरणादायी साहित्य।
  • डिजिटल लिंक: आप इसे Jain eBooks पर खोज सकते हैं।

6. संबंधित साहित्य

  • जम्बू से जम्बूस्वामी: इसी विषय पर आधारित पंडित रतनचंद भारिल्ल जी की कृति।
  • भरत का अन्तर्द्वन्द्व: चक्रवर्ती भरत के वैराग्य पर आधारित उपन्यास।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Story