Cover of यदि चूक गये तो
Dravyanuyog

यदि चूक गये तो

Yadi Chook Gaye To

by Pt. Ratan Chand Bharill

20approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

यदि चूक गये तो (Yadi Chook Gaye To) पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली लघु पुस्तिका है। यह पुस्तक एक आध्यात्मिक "अलार्म" की तरह काम करती है, जो सोए हुए जीव को जगाने का प्रयास करती है। इस पुस्तक का शीर्षक ही एक गंभीर चेतावनी और प्रश्न है: "अनंत काल की भटकन के बाद यह दुर्लभ मनुष्य भव मिला है, यदि इस बार भी आत्म-कल्याण करने से चूक गये, तो फिर क्या होगा?" पुस्तक के मुख्य विचार और संदेश: अवसर की दुर्लभता: भारिल्ल जी ने जैन दर्शन के 'दुर्लभ लब्धि' सिद्धांत को बहुत ही सरल भाषा में समझाया है। वे बताते हैं कि निगोद से निकलकर, त्रस पर्याय और फिर संगी पंचेन्द्रिय मनुष्य बनना कितना कठिन है। इसे वे अक्सर "समुद्र में गिरे हुए रत्न को दोबारा पाने" जैसा बताते हैं। समय की महत्ता: हम अपना अधिकांश जीवन शरीर की सजावट, धन संचय और सामाजिक प्रतिष्ठा में बिता देते हैं। यह पुस्तक याद दिलाती है कि आयु प्रतिपल घट रही है और मृत्यु कभी भी द्वार खटखटा सकती है। चूकने का अर्थ: यहाँ "चूकने" का अर्थ केवल नैतिक पतन नहीं, बल्कि अपनी शुद्ध आत्मा को पहचाने बिना मर जाना है। यदि सम्यग्दर्शन (आत्म-अनुभूति) प्राप्त नहीं किया, तो यह जीवन एक "हारे हुए जुए" की तरह है। निर्णय की घड़ी: लेखक पाठक से सीधा संवाद करते हैं कि यह भव (मनुष्य जन्म) 'जंक्शन' की तरह है, जहाँ से आप मोक्ष की ओर भी जा सकते हैं और पुनः अंतहीन संसार (चार गतियों) में भी गिर सकते हैं। निर्णय अभी इसी क्षण लेना है।

Language
Hindi

Topics

Tattvagyan