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Cover of वीतराग-विज्ञान प्रशिक्षण निर्देशिका
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वीतराग-विज्ञान प्रशिक्षण निर्देशिका

Vitrag-Vigyan Prashikshan Nirdeshika

by Dr. Hukamchand Bharill

50approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Request on WhatsAppDirect Call
ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

वीतराग विज्ञान प्रशिक्षण निर्देशिका (Vitaraag Vigyan Prashikshan Nirdeshika)

मार्गदर्शक/संपादक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. निर्देशिका का संक्षिप्त परिचय

'वीतराग विज्ञान प्रशिक्षण निर्देशिका' जैन धर्म के शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए एक 'टीचर्स मैनुअल' (Teacher's Manual) की तरह कार्य करती है। इसका मुख्य उद्देश्य 'बालबोध पाठमाला' से लेकर 'तत्त्वज्ञान पाठमाला' तक के ८ भागों के पाठ्यक्रम को पढ़ाने की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पद्धति को स्पष्ट करना है।


2. मुख्य विषय और संरचना (Key Highlights)

  1. शिक्षण पद्धति (Teaching Methodology): जैन सिद्धांतों को केवल रटाने के बजाय 'तर्क' और 'युक्ति' से विद्यार्थियों के गले कैसे उतारा जाए, इसका विस्तृत मार्गदर्शन।
  2. पाठ्यक्रम का वर्गीकरण: ८ भागों (बालबोध १-३, वीतराग विज्ञान १-३, और तत्त्वज्ञान १-२) के प्रत्येक पाठ का मुख्य उद्देश्य और उसका 'अध्यात्म' से संबंध।
  3. प्रशिक्षण के सिद्धांत: एक आदर्श जैन शिक्षक के गुण, उसकी जीवनशैली और विद्यार्थी के मानस को समझने की कला।
  4. मूल्यांकन और परीक्षा: विद्यार्थियों की समझ को परखने के लिए प्रश्न-पत्र निर्माण और मूल्यांकन की पारदर्शी प्रक्रिया।
  5. भ्रांति निवारण: शिक्षण के दौरान उठने वाली सामान्य शंकाओं (जैसे—निश्चय-व्यवहार का विरोध, निमित्त-उपादान की जटिलता) का समाधान कैसे दें।

3. निर्देशिका की विशेषताएँ

  • व्यवस्थित रोडमैप: यह शून्य से लेकर शिखर तक जैन दर्शन सीखने का एक व्यवस्थित मार्ग (Curriculum Map) प्रदान करती है।
  • तार्किक आधार: इसमें डॉ. भारिल्ल की विशिष्ट शैली झलकती है, जो "अंधश्रद्धा" के स्थान पर "सम्यक् विवेक" पर जोर देती है।
  • प्रायोगिक निर्देश: शिविरों (Camps) और नियमित पाठशालाओं के सफल संचालन के लिए इसमें व्यावहारिक टिप्स दिए गए हैं।

4. निर्देशिका का मुख्य उद्देश्य

पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट के अनुसार:

"इस निर्देशिका का लक्ष्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षक-पीढ़ी तैयार करना है जो स्वयं आत्म-ज्ञानी हो और दूसरों को भी वीतराग मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे सके।"


5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: स्पष्ट, निर्देशपूर्ण और सरल हिंदी।
  • उपयोगिता: जैन पाठशाला के शिक्षकों, शिविर संचालकों और गंभीर स्वाध्यायियों के लिए अनिवार्य ग्रंथ।
  • डिजिटल लिंक: यह PTST Jaipur और Atma Dharma पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • बालबोध / वीतराग विज्ञान पाठमाला: जिस पाठ्यक्रम पर यह निर्देशिका आधारित है।
  • संस्कार: बच्चों और युवाओं के निर्माण हेतु मार्गदर्शिका।
  • रीति-नीति: आदर्श सामाजिक व्यवहार की शिक्षा हेतु।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

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