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📖 बसंत तिलका
✍️ लेखिका: श्रीमती रूपवती किरण
✨ यह नाटक “बसंत तिलका” वेश्या बसंत तिलका के जीवन का प्रभावशाली चित्रण प्रस्तुत करता है। इसमें दिखाया गया है कि जैनधर्मी श्रेष्ठी चारुदत्त परिस्थितिवश वेश्या भवन में पहुँचकर बसंत तिलका के साथ राग-रंग में लिप्त हो जाते हैं।
🌿 किन्तु उसी वातावरण में भी चारुदत्त बसंत तिलका को जैन धर्म की शिक्षा देते हैं, जिससे उसके जीवन में परिवर्तन आता है। अंततः चारुदत्त, उनकी व्यथित पत्नी और बसंत तिलका—सभी जिन दीक्षा लेकर मुक्ति मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं।
🌟 यह कृति यह संदेश देती है कि मनुष्य चाहे कितना भी भटक गया हो, गलत मार्ग से लौट आना ही सच्ची उन्नति है।
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