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Cover of तीर्थंकर भगवान महावीर
Prathmanuyog

तीर्थंकर भगवान महावीर

Tirthankar Bhagwan Mahavir

by Dr. Hukamchand Bharill

3approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

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ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

तीर्थंकर भगवान महावीर (Tirthankara Bhagwan Mahaveera)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

यह पुस्तक २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जीवन और दर्शन का एक गहरा दार्शनिक और ऐतिहासिक अध्ययन है। डॉ. भारिल्ल ने महावीर के जीवन को केवल पौराणिक कथा के रूप में नहीं, बल्कि आत्मा की वैज्ञानिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक उनके द्वारा प्रतिपादित 'अहिंसा', 'अनेकांत' और 'अपिग्रह' के सिद्धांतों को तार्किक आधार पर स्पष्ट करती है।


2. मुख्य विषय और अध्याय (Key Highlights)

  1. पूर्व जन्मों का वर्णन: महावीर की आत्मा ने किन-किन योनियों से गुजरते हुए सम्यग्दर्शन प्राप्त किया और तीर्थंकर पद की पात्रता विकसित की।
  2. राजकुमार वर्धमान: उनके बचपन और युवावस्था का चित्रण, जिसमें उनके जन्मजात वैराग्य और 'वीर' स्वभाव पर प्रकाश डाला गया है।
  3. महाभिनिष्क्रमण (दीक्षा): राज्य वैभव को छोड़कर सत्य की खोज में निकलने का मर्मस्पर्शी प्रसंग।
  4. कठोर तपस्या और उपसर्ग: साढ़े बारह वर्षों की मौन साधना और चंडकौशिक सर्प व संगम देव द्वारा किए गए भयंकर उपसर्गों (कष्टों) में उनकी अडिग समता।
  5. केवलज्ञान और दिव्यध्वनि: ज्ञान की प्राप्ति और उसके बाद समवशरण में उनके द्वारा दिए गए 'अनेकांत' और 'स्याद्वाद' के क्रांतिकारी उपदेश।
  6. सामाजिक क्रांति: जातिवाद, बलि प्रथा और विषमता के विरुद्ध महावीर का संघर्ष और 'जियो और जीने दो' का सार्वभौमिक संदेश।

3. दार्शनिक स्तंभ

डॉ. भारिल्ल ने महावीर के तीन प्रमुख योगदानों की व्याख्या की है:

  • अहिंसा: केवल शारीरिक हिंसा का त्याग नहीं, बल्कि विचारों की निर्मलता।
  • अनेकांत: सत्य के अनंत पक्षों को स्वीकार करना और दूसरों के विचारों का सम्मान करना।
  • अपरिग्रह: इच्छाओं का परिसीमन कर आंतरिक शांति प्राप्त करना।

4. यह पुस्तक क्यों विशेष है?

डॉ. साहब ने महावीर को एक 'चमत्कारी देवता' के बजाय एक 'पुरुषार्थी आत्मा' के रूप में दिखाया है, जिससे हर साधारण मनुष्य को प्रेरणा मिलती है कि वह भी पुरुषार्थ करके परमात्मा बन सकता है। इसकी भाषा ओजस्वी और तर्कसंगत है।


5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: सुबोध, तार्किक और प्रभावशाली हिंदी।
  • पाठक: युवा, शोधार्थी और आध्यात्मिक जिज्ञासु।
  • डिजिटल लिंक: यह Jain eBooks और Atma Dharma पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • अनेकांत और स्याद्वाद: महावीर के तर्कशास्त्र को गहराई से समझने के लिए।
  • शलाका पुरुष (उत्तरार्द्ध): महावीर कालीन अन्य महापुरुषों के वर्णन हेतु।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Biography