Cover of सूक्तिसुधा
Charnanuyog

सूक्तिसुधा

Suktisudha

by Dr. Hukamchand Bharill

18approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

सूक्तिसुधा (Sukti-Sudha)

संकलनकर्ता: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'सूक्तिसुधा' का शाब्दिक अर्थ है—"सुंदर वचनों का अमृत"। डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी ने इस पुस्तक में आचार्य कुन्दकुन्द, आचार्य अमृतचन्द्र, पंडित टोडरमल जी और अन्य महान आध्यात्मिक संतों के ग्रंथों से सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली वाक्यों (सूक्तियों) का संकलन किया है। यह पुस्तक अध्यात्म के सागर से चुने हुए अनमोल मोतियों के समान है।


2. मुख्य वैचारिक बिंदु (Key Highlights)

  1. आगम का सार: इस संकलन में समयसार, प्रवचनसार और मोक्षमार्ग प्रकाशक जैसे महान ग्रंथों के वे सूत्र शामिल हैं जो जीवन को बदलने की शक्ति रखते हैं।
  2. विषयवार वर्गीकरण: सूक्तियों को विभिन्न विषयों (जैसे—आत्मा, धर्म, कषाय, सुख, और वस्तु स्वातंत्र्य) के अनुसार वर्गीकृत किया गया है, जिससे पाठक अपनी आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन प्राप्त कर सके।
  3. प्रेरणादायी वाक्य: डॉ. साहब ने उन वाक्यों को प्राथमिकता दी है जो सीधे 'अज्ञान' पर प्रहार करते हैं और 'सम्यग्ज्ञान' की ज्योति जलाते हैं।
  4. सरलता और गहराई: ये सूक्तियाँ भाषा में सरल हैं लेकिन इनका अर्थ अत्यंत गहरा और दार्शनिक है।
  5. दैनिक चिंतन हेतु उपयोगी: यह पुस्तक प्रतिदिन एक 'सूक्ति' पढ़कर उस पर गहराई से मनन करने के लिए एक आदर्श मार्गदर्शिका है।

3. पुस्तक का आध्यात्मिक मर्म

डॉ. भारिल्ल इस संकलन के बारे में अक्सर कहते हैं:

"एक छोटी सी सूक्ति भी यदि जीवन के मर्म को छू जाए, तो वह पूरे शास्त्र के स्वाध्याय से अधिक फलदायी हो सकती है। ये वचन अज्ञानी जीव को जगाने के लिए अमृत के समान हैं।"


4. पठन शैली और लाभ

  • त्वरित मार्गदर्शन: जब मन अशांत हो, तब इस पुस्तक की कोई भी सूक्ति शांति और स्पष्टता प्रदान करने में सहायक होती है।
  • स्मरण शक्ति: इन सूक्तियों को याद करना (कंठस्थ करना) बहुत आसान है, जिससे तत्व-ज्ञान हमेशा स्मृति में बना रहता है।
  • लेखन और प्रवचन हेतु: विद्वानों और वक्ताओं के लिए अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से रखने हेतु इसमें प्रमाणिक सूत्र मिलते हैं।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: शुद्ध और प्रभावशाली हिंदी (संस्कृत/प्राकृत उद्धरणों के साथ)।
  • उपयोगिता: सभी आयु वर्ग के स्वाध्यायियों के लिए।
  • डिजिटल लिंक: यह Atma Dharma और Jain eBooks पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • बिखरे मोती: डॉ. भारिल्ल के निजी चिंतन के अनमोल वचनों का संग्रह।
  • बिन्दु में सिन्धु: आध्यात्मिक सूत्रों का संकलन।
  • गागर में सागर: संक्षिप्त आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि के लिए।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

NitiVakya