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Tirthadham Mangalayatan Sahitya KendraShree Aadinath – Kundkund – Kahan Digamber Jain Trust ‘Vimlanchal’, Hari Nagar, Aligarh – 202001 (U.P.) India
आचार्य जिनसेन द्वारा रचित 'हरिवंश पुराण' जैन साहित्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना उन्होंने ईस्वी सन् 783 (शाक संवत 705) में की थी। यह ग्रंथ मुख्य रूप से 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के जीवन और 'हरिवंश' (हरि वंश) के इतिहास पर केंद्रित है। इसमें नेमिनाथ के साथ-साथ श्रीकृष्ण, बलराम, कौरव और पांडवों की कथाओं को जैन धर्म के सिद्धांतों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। 66 सर्गों और हजारों श्लोकों में फैला यह महाकाव्य न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि तत्कालीन समाज, संस्कृति और भूगोल को समझने के लिए भी एक अनमोल दस्तावेज माना जाता है।
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