
* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.
षट्कारक: एक अनुशीलन (Shatkarak: Ek Anushilan) पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक अत्यंत महत्वपूर्ण दार्शनिक पुस्तक है। इस पुस्तक में जैन व्याकरण और न्याय के 'कारक' सिद्धांत को अध्यात्म और वस्तु स्वातंत्र्य के दृष्टिकोण से समझाया गया है। आमतौर पर 'कारक' (कर्ता, कर्म, करण आदि) व्याकरण का विषय माने जाते हैं, लेकिन भारिल्ल जी ने इसमें यह सिद्ध किया है कि प्रत्येक द्रव्य (आत्मा, पुद्गल आदि) अपने कार्य को करने के लिए स्वयं ही छहों कारकों रूप परिणमित होता है।
Topics