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शलाका पुरुष उत्तरार्द्ध (Shalaka Purush Uttarardh) पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक महान ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उपन्यास है। यह उनके दो भागों वाले संकलन का दूसरा हिस्सा है, जो जैन पुराणों के 63 शलाका पुरुषों (Mahan Purush) के जीवन चरित्र पर आधारित है। जहाँ 'पूर्वार्द्ध' (पहला भाग) आदिनाथ भगवान और भरत-बाहुबली जैसे शुरुआती महापुरुषों पर केंद्रित है, वहीं 'उत्तरार्द्ध' जैन इतिहास के बाद के कालखंड के महापुरुषों की गाथा कहता है। इस भाग की मुख्य कथाएँ और नायक: भगवान महावीर का जीवन: इसमें अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म, उनके कठोर तप, केवलज्ञान और उनके द्वारा दिए गए अहिंसा व अनेकांत के संदेश का विस्तृत वर्णन है। श्रीकृष्ण और नेमिनाथ: यह भाग भगवान नेमिनाथ के वैराग्य और नारायण श्रीकृष्ण के जीवन संघर्षों को बहुत गहराई से चित्रित करता है। राम और लक्ष्मण: जैन रामायण (पद्मपुराण) के आधार पर राम, लक्ष्मण और रावण के वास्तविक चरित्र को इसमें उपन्यास की शैली में प्रस्तुत किया गया है। चक्रवर्ती और कामदेव: उत्तरार्द्ध में अन्य महान चक्रवर्तियों और कामदेवों के वैभव और उनके अंततः वैराग्य की कहानियाँ शामिल हैं।
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