Cover of संस्कार
Prathmanuyog

संस्कार

Sanskar

by Pt. Ratan Chand Bharill

40approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

संस्कार (Sanskar) पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक अत्यंत प्रभावशाली लघु पुस्तिका है, जो विशेष रूप से नई पीढ़ी और अभिभावकों (Parents) को केंद्र में रखकर लिखी गई है। इस पुस्तक में पंडित जी ने यह स्पष्ट किया है कि असली 'संस्कार' केवल बाहरी आचरण या शिष्टाचार नहीं हैं, बल्कि वे आत्मा की गहराई में बसे हुए सम्यक विचार हैं। पुस्तक के मुख्य विचार (Key Concepts): संस्कार का वास्तविक अर्थ: पंडित जी के अनुसार, किसी को 'नमस्कार' करना या 'शाकाहारी' होना मात्र एक आदत हो सकती है, लेकिन उन क्रियाओं के पीछे के तर्क और महत्व को समझना असली संस्कार है। परिवार की भूमिका: भारिल्ल जी ने जोर दिया है कि बच्चों को उपदेश देने से अधिक प्रभावी यह है कि माता-पिता स्वयं वैसा आचरण करें। बच्चे वह नहीं सीखते जो हम 'कहते' हैं, बल्कि वह सीखते हैं जो हम 'करते' हैं। धार्मिक संस्कार: जैन धर्म के संदर्भ में, देव-दर्शन, पानी छानकर पीना, और रात्रि भोजन त्याग जैसे संस्कारों को उन्होंने वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाया है, ताकि युवा पीढ़ी इन्हें "बोझ" न मानकर "जीवन शैली" के रूप में अपनाए। स्वतंत्रता और संस्कार: यहाँ भी वे अपने प्रिय सिद्धांत 'वस्तु स्वातंत्र्य' को लाते हैं। वे समझाते हैं कि हम किसी पर जबरदस्ती संस्कार थोप नहीं सकते; हम केवल एक ऐसा वातावरण (Environment) बना सकते हैं जहाँ जीव स्वयं सही निर्णय लेना सीखे। विपरीत परिस्थितियों में संस्कार: यह पुस्तक सिखाती है कि असली संस्कारों की परीक्षा तब होती है जब परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों। धैर्य, संतोष और क्षमा जैसे आंतरिक संस्कार ही मनुष्य को महान बनाते हैं।

Language
Hindi

Topics

ComicsAwarenessTattvagyanMotivational