
Samyagjyanchandrika Jivakand evam Arthasandrshti
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Publisher
Vitragvani Prakashak📚 सम्यग्ज्ञानचन्द्रिका जीवकाण्ड एवं अर्थसंदृष्टि
✍️ लेखक : पंडितप्रवर टोडरमल जी
🪷 अनुवाद : डॉ. श्रीमती उज्ज्वला डी. शाहा
यह ग्रन्थ जैन सिद्धान्त के अत्यन्त गूढ़ एवं तत्त्वमय विषयों का सरल और प्रामाणिक विवेचन प्रस्तुत करता है।
इसमें जीव के स्वरूप, गुणस्थान, कर्मबन्ध, मोक्षमार्ग तथा आत्मतत्त्व का सूक्ष्म निरूपण किया गया है।
सम्यग्ज्ञानचन्द्रिका में गोम्मटसार जीवकाण्ड के रहस्यमय सिद्धान्तों को सहज भाषा में समझाया गया है।
अर्थसंदृष्टि के माध्यम से प्रत्येक तत्त्व का गहन भावार्थ एवं आध्यात्मिक मर्म स्पष्ट होता है।
जिनागम एवं आत्मचिन्तन में रुचि रखने वाले साधकों हेतु यह ग्रन्थ अत्यन्त उपयोगी एवं संग्रहणीय है।
🕉️ आत्मतत्त्व की गहराई को समझने का एक अनुपम ग्रन्थ।
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