JinWaniजिनवाणी
HomeBrowsePublishersPDF SitesAbout
Join as Publisher
Menu
HomeBrowse BooksView PublishersPDF SitesAboutPublisher Login
Join as Publisher

JinWani

A non-profit digital initiative to make physical Jain literature accessible by bridging the gap between readers and publishers.

HomePublishers DirectoryPublisher LoginJoin as PublisherPDF Sites ListAbout UsContact

Legal

Terms of ServicePrivacy PolicyUser Manual

Connect

FacebookFacebookYouTubeYouTubeTelegramTelegramXXInstagramInstagram JinSwara

Disclaimer: Information on this website is shared by respective publishers. While we strive to keep details accurate and up to date, Jinwani by JinSwara cannot guarantee the completeness or accuracy of publisher-provided information.

© 2026 JinWani. All rights reserved.

Back to Search
Cover of रक्षाबंधन और दीपावली
Charnanuyog

रक्षाबंधन और दीपावली

Rakshabandhan Aur Deepawali

by Dr. Hukamchand Bharill

5approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Request on WhatsAppDirect Call
ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

रक्षाबंधन और दीपावली (Rakshabandhan aur Deepawali)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

यह लघु पुस्तिका जैन धर्म के दो प्रमुख पर्वों—रक्षाबंधन और दीपावली—के पीछे छिपे वास्तविक उद्देश्यों और उनके गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालती है। डॉ. भारिल्ल ने इसमें प्रचलित भ्रांतियों को दूर कर इन त्योहारों को 'वीतरागता' और 'धर्म-रक्षा' के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया है।


2. मुख्य विषय और विवेचन (Key Highlights)

क. रक्षाबंधन: वात्सल्य और धर्म-रक्षा का पर्व

  • ऐतिहासिक प्रसंग: हस्तिनापुर के राजा पद्म के मंत्री बलि द्वारा ७०० दिगंबर मुनियों पर किए गए घोर उपसर्ग (कष्ट) की कथा।
  • मुनि विष्णुकुमार का पुरुषार्थ: कैसे मुनि विष्णुकुमार ने अपनी ऋद्धि (अलौकिक शक्ति) का प्रयोग कर ७०० मुनियों के प्राणों की रक्षा की।
  • आध्यात्मिक मर्म: रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि यह 'वात्सल्य अंग' का प्रतीक है, जहाँ साधर्मी एक-दूसरे के धर्म की रक्षा का संकल्प लेते हैं।

ख. दीपावली: निर्वाण और ज्ञान का महोत्सव

  • भगवान महावीर का मोक्ष: कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर के पावापुरी से मोक्ष गमन का प्रसंग।
  • ज्ञान का दीपक: महावीर के जाने के बाद संसार में फैले अज्ञान के अंधकार को दूर करने के लिए गौतम गणधर द्वारा 'केवलज्ञान' प्राप्त करने का महत्व।
  • पूजन का स्वरूप: दीपावली पर लक्ष्मी (सांसारिक धन) की पूजा के बजाय 'निर्वाण लक्ष्मी' और 'ज्ञान ज्योति' की पूजा करने का निर्देश।

3. पुस्तक का संदेश

डॉ. भारिल्ल इस पुस्तक के माध्यम से यह स्पष्ट करते हैं कि:

"पर्व केवल बाहरी उत्सव मनाने के लिए नहीं हैं, बल्कि वे हमें अपने महापुरुषों के त्याग और उनके द्वारा बताए गए आत्म-कल्याण के मार्ग की याद दिलाने के लिए हैं।"


4. लेखन शैली और उपयोगिता

  • संक्षिप्त और प्रभावशाली: मात्र २४ पृष्ठों की यह पुस्तिका त्योहारों के मर्म को कम समय में समझने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
  • तार्किक प्रस्तुति: डॉ. साहब की विशिष्ट शैली में हर घटना को सिद्धांतों (जैसे कर्म सिद्धांत) के साथ जोड़कर समझाया गया है।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: सरल, सुबोध और तार्किक हिंदी।
  • उपयोगिता: बच्चों, युवाओं और परिवारों में जैन संस्कारों के प्रचार हेतु।
  • डिजिटल लिंक: यह Jain eBooks और PTST Jaipur पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • सप्तशतक: ७०० मुनियों के उपसर्ग की विस्तृत कथा (पंडित रतनचंद भारिल्ल कृत)।
  • तीर्थंकर भगवान महावीर: महावीर के जीवन और निर्वाण के विस्तार के लिए।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Story