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Dravyanuyog

रहस्य : रहस्यपूर्ण चिट्ठी का

Rahasya : Rahasyapurn Chitti Ka

by Dr. Hukamchand Bharill

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

रहस्य : रहस्यपूर्ण चिट्ठी का (Rahasya: Rahasyapurna Chitti Ka)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
मूल रचना: पंडित टोडरमल जी (Pandit Todarmal Ji)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

यह पुस्तक १८वीं शताब्दी के महान विद्वान पंडित टोडरमल जी द्वारा मुल्तान के साधर्मियों को लिखी गई एक ऐतिहासिक 'चिट्ठी' (पत्र) पर आधारित है। डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी ने इस पत्र के एक-एक शब्द का 'रहस्य' खोलते हुए इसे आधुनिक मुमुक्षुओं के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में प्रस्तुत किया है।


2. मुख्य विषय और आध्यात्मिक मर्म (Key Highlights)

  1. चिट्ठी का इतिहास: मुल्तान (अब पाकिस्तान में) के साधर्मियों ने सम्यग्दर्शन और अध्यात्म के अभ्यास से जुड़े कुछ गहरे प्रश्न पंडित टोडरमल जी को भेजे थे। यह पुस्तक उन जटिल प्रश्नों के सरल और सटीक समाधानों का विश्लेषण करती है।
  2. निश्चय और व्यवहार का संतुलन: चिट्ठी का सबसे बड़ा रहस्य 'निश्चय' (आत्मा का शुद्ध स्वरूप) और 'व्यवहार' (बाहरी क्रियाकांड) के बीच सही संतुलन बनाना है। डॉ. साहब ने समझाया है कि बिना निश्चय के व्यवहार 'बोझ' है और बिना व्यवहार के निश्चय 'स्वच्छंदता' है।
  3. सम्यग्दर्शन की पात्रता: सम्यग्दर्शन प्राप्त करने के लिए जीव की मानसिक स्थिति कैसी होनी चाहिए और 'तत्व-निर्णय' की क्या भूमिका है, इसे बहुत ही स्पष्टता से समझाया गया है।
  4. अनुभव और विचार: पंडित टोडरमल जी ने स्पष्ट किया था कि आत्म-अनुभव के समय 'विकल्प' (विचार) कैसे शांत होते हैं। डॉ. भारिल्ल ने इस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया का अद्भुत वर्णन किया है।
  5. स्वच्छंदता का निषेध: कई लोग अध्यात्म को पढ़कर क्रियाकांड छोड़ देते हैं लेकिन परिणामों में शुद्धि नहीं लाते। इस पुस्तक में ऐसी 'स्वच्छंदता' के विरुद्ध कड़ी चेतावनी दी गई है।

3. पुस्तक की विशेषताएँ

  • प्रश्नोत्तर शैली: मूल पत्र में पूछे गए कठिन प्रश्नों को डॉ. साहब ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तार्किक ढंग से उत्तरित किया है।
  • साधना का मार्ग: यह पुस्तक केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि यह 'साधना की विधि' (Method of Practice) सिखाती है।
  • सूक्ष्म विवेचन: इसमें 'आस्रव-भाव' और 'शुद्ध-भाव' के बीच के बारीक अंतर को बहुत ही गहराई से पकड़ा गया है।

4. पुस्तक का मुख्य संदेश

डॉ. भारिल्ल इस पुस्तक के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि:

"पंडित टोडरमल जी की यह चिट्ठी कोई साधारण पत्र नहीं, बल्कि यह मोक्षमार्ग का संक्षिप्त चार्ट है। इसे समझना अपनी आत्मा के रहस्य को समझने जैसा है।"


5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: तार्किक, गंभीर और प्रभावशाली हिंदी।
  • उपयोगिता: उन साधकों के लिए जो 'मोक्षमार्ग प्रकाशक' पढ़ चुके हैं और अध्यात्म की सूक्ष्मताओं में उतरना चाहते हैं।
  • डिजिटल लिंक: यह Jain eBooks और Atma Dharma पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • मोक्षमार्ग प्रकाशक: पंडित टोडरमल जी की मुख्य रचना।
  • निश्चय-व्यवहार: डॉ. भारिल्ल द्वारा इन दो नयों का विस्तृत विवेचन।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Tattvagyan