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Cover of प्रवचनसार पद्यानुवाद
Dravyanuyog

प्रवचनसार पद्यानुवाद

Pravachansar Padyanuvad

by Dr. Hukamchand Bharill

3approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

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ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

प्रवचनसार पद्यानुवाद (Pravachansara Padyanuvad)

मूल रचना: आचार्य कुन्दकुन्ददेव (प्राकृत गाथाएँ)
पद्यानुवाद: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'प्रवचनसार' आचार्य कुन्दकुन्ददेव के सुप्रसिद्ध 'प्रभृत-त्रयी' (समयसार, प्रवचनसार, पंचास्तिकाय) का महत्वपूर्ण अंग है। जहाँ 'समयसार' श्रद्धा (दर्शन) प्रधान है, वहीं 'प्रवचनसार' ज्ञान और चारित्र प्रधान ग्रंथ है। डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी ने इसकी गहन दार्शनिक गाथाओं का सरल और प्रभावशाली हिंदी पद्यानुवाद किया है।


2. मुख्य विषय और विभाग (Key Highlights)

ग्रंथ तीन मुख्य प्रज्ञापनों (अध्यायों) में विभाजित है, जिनका पद्यानुवाद बहुत ही स्पष्ट है:

  1. ज्ञान तत्त्व प्रज्ञापन: इसमें ज्ञान और ज्ञेय के संबंध, केवलज्ञान की महिमा और सुख-दुख के वास्तविक स्वरूप का वर्णन है।
  2. ज्ञेय तत्त्व प्रज्ञापन: विश्व के द्रव्यों (Jiva, Pudgala, etc.) और उनके गुण-पर्यायों का वैज्ञानिक विवेचन। इसमें द्रव्य की नित्यता और अनित्यता के बीच के सूक्ष्म संतुलन को समझाया गया है।
  3. चरणानुयोग सूचक चूलिका: श्रमण (मुनि) धर्म, उनके आचरण और मोक्षमार्ग की व्यावहारिक चर्या का विस्तार से वर्णन।

3. पद्यानुवाद की एक बानगी (Sample Verse)

ज्ञान और सुख की अभिन्नता को डॉ. साहब ने इस प्रकार पिरोया है:

"जो ज्ञान है सो सुख ही है, जो सुख है सो ही ज्ञान है।"
"सुख-ज्ञानमय निज आत्मा, बस मग्न होने योग्य है ॥"


4. पुस्तक की विशेषताएँ

  • दार्शनिक गहराई: यह ग्रंथ जैन तत्वमीमांसा (Metaphysics) और ज्ञानमीमांसा (Epistemology) को समझने के लिए अनिवार्य है।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: डॉ. भारिल्ल ने पद्यानुवाद में यह सुनिश्चित किया है कि 'उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य' जैसे कठिन सिद्धांत सरल शब्दों में समझ आ सकें।
  • चारित्र का मर्म: मुनि धर्म की सूक्ष्मताओं को बहुत ही गरिमामयी काव्य शैली में प्रस्तुत किया गया है।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: प्रवाहमयी, तार्किक और गंभीर हिंदी (काव्य)।
  • डिजिटल लिंक: यह Jain eBooks और Atma Dharma पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • प्रवचनसार अनुशीलन: डॉ. भारिल्ल द्वारा लिखित इस ग्रंथ की विस्तृत आधुनिक व्याख्या।
  • समयसार पद्यानुवाद: कुन्दकुन्ददेव के सबसे महान आध्यात्मिक ग्रंथ का काव्य रूप।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Kavya