प्रवचनसार महामंडल विधान (Pravachansara Mahamandal Vidhan)
लेखक/रचयिता: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
मूल आधार: आचार्य कुन्दकुन्ददेव कृत 'प्रवचनसार'
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर
1. विधान का संक्षिप्त परिचय
'प्रवचनसार महामंडल विधान' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी की एक अद्वितीय रचना है। इसमें उन्होंने आचार्य कुन्दकुन्द के महान ग्रंथ 'प्रवचनसार' की गूढ़ दार्शनिक गाथाओं और सिद्धांतों को पूजन और अर्घ्य के रूप में पिरोया है। यह विधान केवल एक क्रियाकांड नहीं है, बल्कि सामूहिक रूप से तत्व-ज्ञान का अभ्यास करने की एक "महोत्सव शैली" है।
2. मुख्य संरचना और विषय (Key Highlights)
यह विधान 'प्रवचनसार' के तीन मुख्य विभागों (प्रज्ञापनों) के आधार पर व्यवस्थित है:
- ज्ञान तत्त्व प्रज्ञापन: इसमें ज्ञान की महिमा, केवलज्ञान का स्वरूप और सुख-दुख के वास्तविक अर्थ पर आधारित अर्घ्य समर्पित किए जाते हैं।
- ज्ञेय तत्त्व प्रज्ञापन: विश्व के ६ द्रव्यों, उनके गुण और पर्यायों के वैज्ञानिक विवेचन को भक्तिमय पंक्तियों में प्रस्तुत किया गया है।
- चरणानुयोग सूचक चूलिका: मुनि धर्म के स्वरूप, २८ मूलगुणों और वीतरागी आचरण की वंदना करने वाले पदों का समावेश है।
3. विधान की आध्यात्मिक विशेषताएँ
- सिद्धांत और भक्ति का मेल: डॉ. साहब की विशेषता यह है कि वे भक्ति के बहाने 'द्रव्यानुयोग' (Metaphysics) के कठिन विषयों जैसे—उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य और ज्ञान-ज्ञेय संबंध को सरल बना देते हैं।
- अध्यात्म प्रधान जयमालाएँ: विधान की जयमालाएँ स्वयं में लघु 'समयसार' की तरह हैं, जो जीव को आत्म-लीनता की प्रेरणा देती हैं।
- शुद्ध पाठ और छंद: इसमें प्रयुक्त छंद गेय (गाने योग्य) और तार्किक हैं, जो श्रोताओं के मन में शांति और वैराग्य उत्पन्न करते हैं।
4. उत्सव का उद्देश्य
डॉ. भारिल्ल के अनुसार, इस विधान का मुख्य उद्देश्य यह है कि:
"श्रावक केवल जल-अक्षत न चढ़ाए, बल्कि 'प्रवचन' (तीर्थंकर की दिव्यध्वनि) के 'सार' (शुद्ध आत्मा) को अपने भीतर उतारने का प्रयास करे।"
5. संदर्भ और उपलब्धता
- भाषा: शुद्ध हिंदी (ब्रज और खड़ी बोली का मिश्रण) एवं मूल प्राकृत गाथाओं के अंश।
- उपयोगिता: बड़े धार्मिक आयोजकों, पंचकल्याणक महोत्सवों और सामूहिक आध्यात्मिक गोष्ठियों के लिए।
- डिजिटल लिंक: यह Jain eBooks और Atma Dharma पर उपलब्ध है।
6. संबंधित साहित्य
- प्रवचनसार अनुशीलन: इस विधान के दार्शनिक आधार को विस्तार से समझने हेतु।
- अर्चना (JB): डॉ. भारिल्ल द्वारा संकलित अन्य पूजन संग्रह।
- समयसार महामंडल विधान: कुन्दकुन्द के मुख्य ग्रंथ पर आधारित विधान।