Cover of पश्चाताप
Charnanuyog

पश्चाताप

Pashchatap

by Dr. Hukamchand Bharill

10approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

पश्चाताप (Pashchatap)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'पश्चाताप' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक अत्यंत भावपूर्ण और मनोवैज्ञानिक आध्यात्मिक उपन्यास है। यह पुस्तक दिखाती है कि कैसे अज्ञानवश किए गए पापों का बोझ आत्मा को दबाता है और कैसे 'सच्चा पश्चाताप' और 'भेद-विज्ञान' उस बोझ को उतारकर जीव को पवित्र बना देते हैं।


2. मुख्य कथानक और संदेश (Key Highlights)

  1. पाप और ग्लानी: कहानी के पात्रों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि मनुष्य अपनी कषायों (क्रोध, लोभ, मोह) के वशीभूत होकर गलतियाँ कर बैठता है, लेकिन उन गलतियों का अहसास ही सुधार की पहली सीढ़ी है।
  2. सच्चे पश्चाताप का स्वरूप: डॉ. साहब स्पष्ट करते हैं कि मात्र रोना या दुखी होना पश्चाताप नहीं है। सच्चा पश्चाताप वह है जिसमें भविष्य में वैसी गलती न करने का दृढ़ संकल्प हो और अपनी शुद्ध आत्मा का आश्रय लिया जाए।
  3. हृदय परिवर्तन: उपन्यास की शैली होने के कारण यह पाठकों को गहराई से जोड़ती है। इसमें दिखाया गया है कि एक अपराधी या पापी जीव भी यदि अपनी 'ज्ञायक' स्वभाव को पहचान ले, तो वह वर्तमान में ही शांति प्राप्त कर सकता है।
  4. अध्यात्म का प्रयोग: भारिल्ल जी ने इसमें यह सिद्ध किया है कि 'सॉरी' कहना एक सामाजिक व्यवहार हो सकता है, लेकिन 'प्रायश्चित' एक आंतरिक आध्यात्मिक शुद्धि की प्रक्रिया है।

3. दार्शनिक दृष्टिकोण

डॉ. भारिल्ल इस पुस्तक में यह संदेश देते हैं कि:

"अपराध शरीर या मन से होता है, लेकिन उसे जानने वाली आत्मा हमेशा शुद्ध रहती है। पश्चाताप उस अशुद्धि को धोने का साबुन है जो हमें वापस अपने शुद्ध स्वरूप की ओर ले जाता है।"


4. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: सरल, प्रवाहमयी और मर्मस्पर्शी हिंदी।
  • उपयोगिता: उन लोगों के लिए जो अतीत की गलतियों के बोझ (Guilt) से दबे हैं और मानसिक शांति की तलाश में हैं।
  • डिजिटल लिंक: आप इसे Jain eBooks या Atma Dharma पर पढ़ सकते हैं।

5. संबंधित साहित्य

  • ये हैं मेरी नारियाँ: वैराग्य प्रधान आध्यात्मिक उपन्यास।
  • सम्यग्दर्शन: दृष्टि परिवर्तन और सच्ची श्रद्धा हेतु।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Kavya