
* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.
परीक्षामुख (Parikshamukha) जैन न्याय (Jain Logic) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत ग्रंथ है, जिसकी रचना आचार्य माणिक्यनन्दि (8वीं शताब्दी के लगभग) ने की थी। इसे जैन न्याय का "प्रवेशद्वार" माना जाता है. ptst.in ptst.in +4 मुख्य विवरण रचनाकार: आचार्य माणिक्यनन्दि. आधार: यह ग्रंथ आचार्य अकलंकदेव के 'न्याय' संबंधी साहित्य का सार है. शैली: यह 'सूत्र' शैली में लिखा गया है, जिसमें कुल 208 सूत्र हैं. विषय: इसका मुख्य प्रतिपाद्य प्रमाण (Valid Knowledge) और प्रमाणाभास (False Knowledge) का विवेचन है.
Topics