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परमभावप्रकाशक नयचक्र

Paramabhavaprakashak Nayachakra

by Dr. Hukamchand Bharill

25approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

परम भाव प्रकाशक नयचक्र

परमभाव प्रकाशक नयचक्र (Parambhav Prakashak Nayachakra) जैन दर्शन में वस्तु के स्वरूप और दृष्टिकोण को समझने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह प्रसिद्ध विद्वान डॉ. हुकमचंद भारिल्ल द्वारा रचित है, जो जैन आगम में बिखरे हुए 'नय' (दृष्टिकोण या अपेक्षा) के सिद्धांतों को सरल और व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करता है।

मुख्य बातें और उद्देश्य:

  • मूल उद्देश्य: वस्तु को समझने के लिए विभिन्न दृष्टियों (नयों), विशेष रूप से निश्चय नय (आंतरिक/वास्तविक सत्य) और व्यवहार नय (बाहरी/उपयोगी सत्य) के सूक्ष्म अंतर और समन्वय को स्पष्ट करना।
  • महत्व: इसके माध्यम से साधक अपने आत्म-स्वरूप (निजात्मा) को पहचानकर वस्तु के एकांत (सिर्फ एक पहलू) से बचकर यथार्थ और संतुलित ज्ञान प्राप्त कर सकता है।

स्रोत और उपलब्धता:

Language
Gujarati

Topics

EpistemologyTattvagyanDravyaNayavadaAnekantavadaSyadvadaAgamaSutraRatnatraya