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परमभाव प्रकाशक नयचक्र (Parambhav Prakashak Nayachakra) जैन दर्शन में वस्तु के स्वरूप और दृष्टिकोण को समझने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह प्रसिद्ध विद्वान डॉ. हुकमचंद भारिल्ल द्वारा रचित है, जो जैन आगम में बिखरे हुए 'नय' (दृष्टिकोण या अपेक्षा) के सिद्धांतों को सरल और व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करता है।
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