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पर से कुछ भी सम्बन्ध नहीं

Par Se Kuch Bhi Sambandh Nahin

by Pt. Ratan Chand Bharill

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

पर से कुछ भी सम्बन्ध नहीं

लेखक: पण्डित रतनचन्द भारिल्ल (Pt. Ratan Chand Bharill)


📘 पुस्तक विवरण (Book Details)

विवरणजानकारी
विषयद्रव्यानुयोग (Dravyanuyog)
प्रकाशकपण्डित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (Pandit Todarmal Smarak Trust)
अनुमानित मूल्य₹ 10.00

✨ पुस्तक का सार: वस्तु स्वातंत्र्य और अकर्तृत्ववाद

यह कृति जैन दर्शन के सबसे क्रांतिकारी सिद्धांतों में से एक पर आधारित है। पंडित भारिल्ल जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि जब तक जीव 'पर' (बाहरी वस्तुओं) में अपनापन खोजता है, तब तक वह दुखी रहता है।

🌟 मुख्य आध्यात्मिक बिंदु

"पर से मेरा कोई संबंध नहीं" — यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि परम शांति का मार्ग है।

  • द्रव्य की स्वतंत्रता: विश्व का प्रत्येक द्रव्य (Entity) अपने आप में पूर्ण और स्वतंत्र है। एक चेतन आत्मा किसी जड़ पुद्गल या दूसरी आत्मा का कुछ भी करने में असमर्थ है।
  • मिथ्यात्व का त्याग: हमारा सारा दुख इस गलत धारणा से पैदा होता है कि बाहरी परिस्थितियाँ हमें सुख या दुख देती हैं। इस पराधीनता को छोड़ना ही मुक्ति है।
  • ज्ञाता-दृष्टा स्वभाव: आत्मा का वास्तविक कार्य केवल 'जानना और देखना' है। शरीर में होने वाले परिवर्तन पुद्गल की अवस्थाएँ हैं, आत्मा की नहीं।
  • संयोग और वियोग: शरीर और आत्मा का साथ होना मात्र एक 'संयोग' है (जैसे पटरी पर चलती रेलगाड़ियाँ)। वे साथ दिखते जरूर हैं, पर स्वभाव से कभी एक नहीं होते।

💡 इस पुस्तक को क्यों पढ़ें?

यदि आप मानसिक तनाव, बाहरी दबाव और 'कर्ता' बनने के बोझ से मुक्त होकर अपने भीतर सच्ची शांति खोजना चाहते हैं, तो यह लघु पुस्तिका आपके लिए एक नींव का पत्थर साबित होगी।


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Language
Hindi

Topics

Tattvagyan