
Par Se Kuch Bhi Sambandh Nahin
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लेखक: पण्डित रतनचन्द भारिल्ल (Pt. Ratan Chand Bharill)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विषय | द्रव्यानुयोग (Dravyanuyog) |
| प्रकाशक | पण्डित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (Pandit Todarmal Smarak Trust) |
| अनुमानित मूल्य | ₹ 10.00 |
यह कृति जैन दर्शन के सबसे क्रांतिकारी सिद्धांतों में से एक पर आधारित है। पंडित भारिल्ल जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि जब तक जीव 'पर' (बाहरी वस्तुओं) में अपनापन खोजता है, तब तक वह दुखी रहता है।
"पर से मेरा कोई संबंध नहीं" — यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि परम शांति का मार्ग है।
यदि आप मानसिक तनाव, बाहरी दबाव और 'कर्ता' बनने के बोझ से मुक्त होकर अपने भीतर सच्ची शांति खोजना चाहते हैं, तो यह लघु पुस्तिका आपके लिए एक नींव का पत्थर साबित होगी।
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