* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.
Publisher
Tirthadham Mangalayatan Sahitya KendraShree Aadinath – Kundkund – Kahan Digamber Jain Trust ‘Vimlanchal’, Hari Nagar, Aligarh – 202001 (U.P.) India
पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी के प्रवचनों के इस संकलन'पंचकल्याणक प्रवचन' पुस्तक तीर्थंकरों के पांच पावन कल्याणकों के आध्यात्मिक रहस्य को उजागर करने वाली एक अनमोल कृति है। इस पुस्तक में स्वामी जी ने गर्भ, जन्म, दीक्षा, ज्ञान और निर्वाण कल्याणकों को केवल ऐतिहासिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि 'वीतराग विज्ञान' और 'भेद-विज्ञान' के चश्मे से समझाया है। उनका मुख्य जोर इस बात पर रहता है कि एक भव्य जीव को इन कल्याणकों के माध्यम से अपनी ही शुद्ध आत्मा के वैभव को पहचानना चाहिए। यह ग्रंथ मुमुक्षु जीवों को यह दृष्टि प्रदान करता है कि कैसे संसार की असारता को समझकर और राग-द्वेष का त्याग कर 'सम्यक दर्शन' की प्राप्ति की जा सकती है। सरल शब्दों में कहें तो, यह पुस्तक कर्मकांड से ऊपर उठकर आत्म-अनुभूति के मार्ग पर चलने की एक सच्ची मार्गदर्शिका है।
Topics