Cover of पंचास्तिकाय परिशीलन
Dravyanuyog

पंचास्तिकाय परिशीलन

Panchastikay Parishilan

by Pt. Ratan Chand Bharill

50approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

यह आचार्य कुन्दकुन्द के मूल ग्रंथ 'पंचास्तिकाय संग्रह' पर आधारित है। यह मात्र एक अनुवाद नहीं है, बल्कि यह मूल ग्रंथ के प्रत्येक सिद्धांत को तर्क और अध्यात्म की कसौटी पर कसने वाला एक गहन अनुशीलन है। इस कृति की मुख्य विशेषताएँ: विषय-वस्तु: इसमें विश्व की संरचना के पाँच अस्तिकायों (जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश) और काल द्रव्य का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विवेचन किया गया है। निश्चय और व्यवहार का संतुलन: डॉ. भारिल्ल ने इसमें आचार्य अमृतचन्द्र की 'समयव्याख्या' और आचार्य जयसेन की 'तात्पर्यवृत्ति' टीकाओं का सार समाहित किया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि कैसे इन द्रव्यों का ज्ञान हमें अपनी 'शुद्ध आत्मा' तक पहुँचने में मदद करता है। सरल और तार्किक भाषा: मूल प्राकृत गाथाओं के अर्थ को आज के परिप्रेक्ष्य में उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है, जिससे यह सामान्य पाठकों और विद्वानों—दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है। पद्यानुवाद और भावार्थ: इसमें प्रत्येक गाथा का सरल हिंदी पद्यानुवाद दिया गया है, जो स्वाध्याय के समय इसे कंठस्थ करने और समझने में सहायक होता है। वस्तु स्वातंत्र्य का प्रतिपादन: भारिल्ल जी ने इसमें विशेष रूप से यह सिद्ध किया है कि प्रत्येक द्रव्य अपने स्वभाव में स्वतंत्र है, जो जीव को 'पर' (दूसरों) के प्रति कर्तापन के बोझ से मुक्त करता है।

Language
Hindi

Topics

Tattvagyan