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नींव का पत्थर (Neev Ka Pathar) पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक कृति है। यह पुस्तक मुख्य रूप से जैन दर्शन के एक मौलिक सिद्धांत 'वस्तु स्वातंत्र्य' (Vastu Swatantrya) पर आधारित है.
मुख्य विशेषताएं और सारांश: दार्शनिक आधार: इस पुस्तक में 'वस्तु स्वातंत्र्य' को मोक्ष रूपी महल की "नींव का पत्थर" बताया गया है. इसका अर्थ है कि विश्व का प्रत्येक द्रव्य (entity) अपने स्वभाव में स्वतंत्र है और कोई भी एक द्रव्य दूसरे द्रव्य का कुछ भी करने में समर्थ नहीं है. प्रस्तुति शैली: यह एक उपन्यास (Novel) के रूप में लिखी गई है, जिससे गहरे आध्यात्मिक सिद्धांतों को समझना सरल हो जाता है. कथानक: कहानी 'जीवराज' नामक पात्र के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जीवन के उतार-चढ़ावों से गुजरते हुए अंततः आत्म-कल्याण और आध्यात्मिक मुक्ति के मार्ग को खोज लेता है. उद्देश्य: पुस्तक का मुख्य लक्ष्य पाठकों को यह समझाना है कि सच्ची शांति और मुक्ति बाहरी परिस्थितियों को बदलने से नहीं, बल्कि स्वयं के स्वतंत्र स्वभाव को पहचानने से मिलती है.
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