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Cover of णमोकार महामंत्र : एक अनुशीलन
Dravyanuyog

णमोकार महामंत्र : एक अनुशीलन

Namokar Mahamantra : Ek Anushilan

by Dr. Hukamchand Bharill

20approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Request on WhatsAppDirect Call
ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

णमोकार महामंत्र : एक अनुशीलन (Namokar Mahamantra: Ek Anushilan)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'णमोकार महामंत्र : एक अनुशीलन' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी की एक शोधपरक और क्रांतिकारी कृति है। यह पुस्तक णमोकार मंत्र को एक जादुई या चमत्कारिक मंत्र के बजाय 'वीतरागता के विज्ञान' के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें मंत्र के एक-एक पद की सूक्ष्म व्याख्या 'निश्चय' और 'व्यवहार' नय के आधार पर की गई है।


2. मुख्य वैचारिक बिंदु (Key Highlights)

  1. गुण-मुख्य भक्ति: डॉ. साहब ने सिद्ध किया है कि यह मंत्र किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि गुणों (Attributes) को नमस्कार करता है। यह 'व्यक्तिवाद' से हटाकर 'गुणवाद' की ओर ले जाने वाला मंत्र है।
  2. पाँचों पदों का सूक्ष्म विश्लेषण:
    • अरिहंत और सिद्ध: उनके स्वरूप और उनके बीच के अंतर का तार्किक विवेचन।
    • आचार्य, उपाध्याय और साधु: उनकी भूमिका और उनके २८ मूलगुणों का आध्यात्मिक महत्व।
  3. अनादि-निधनता: यह मंत्र क्यों अनादि है और इसका अर्थ शाश्वत क्यों है, इस पर ऐतिहासिक और दार्शनिक प्रकाश।
  4. मंत्र का फल: डॉ. साहब स्पष्ट करते हैं कि मंत्र का फल सांसारिक सुख (पैसा, प्रतिष्ठा) प्राप्त करना नहीं, बल्कि कषायों की मंदता और आत्म-विशुद्धि है।
  5. वस्तु स्वातंत्र्य और णमोकार: इस मंत्र का 'अकर्तृत्ववाद' से क्या संबंध है? भारिल्ल जी समझाते हैं कि जिन गुणों को हम नमस्कार कर रहे हैं, वे हमारे अपने भीतर भी मौजूद हैं।

3. पुस्तक का आध्यात्मिक संदेश

डॉ. भारिल्ल इस अनुशीलन में एक महत्वपूर्ण सूत्र देते हैं:

"णमोकार मंत्र पढ़ना केवल होठों की क्रिया नहीं है; असली नमस्कार वह है जिसमें हम भगवान के गुणों को पहचानें और अपने भीतर भी उन्हीं गुणों को प्रकट करने का पुरुषार्थ करें।"


4. लेखन शैली और विशेषताएँ

  • तार्किक और न्यायपूर्ण: मंत्र के प्रति अंधश्रद्धा को हटाकर सम्यक श्रद्धा जागृत करने वाली शैली।
  • भ्रांति निवारण: लोग मंत्र का उपयोग संकट दूर करने के लिए करते हैं, डॉ. साहब ने इसके वास्तविक आध्यात्मिक उपयोग को स्पष्ट किया है।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: गंभीर, तार्किक और प्रभावशाली हिंदी।
  • उपयोगिता: जैन दर्शन के विद्यार्थियों और प्रतिदिन मंत्र जाप करने वाले मुमुक्षुओं के लिए एक अनिवार्य गाइड।
  • डिजिटल लिंक: यह Atma Dharma और Jain eBooks पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • णमोकार महामंत्र (पंडित रतनचंद भारिल्ल): इसी विषय पर सरल व्याख्या।
  • सम्यग्दर्शन: सच्ची श्रद्धा के स्वरूप को समझने के लिए।
  • वीतरागी व्यक्तित्व: अरिहंतों के स्वरूप को गहराई से जानने हेतु।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Mantra