Cover of णमोकार महामंत्र
Dravyanuyog

णमोकार महामंत्र

Namokar Mahamantra

by Pt. Ratan Chand Bharill

10approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित पुस्तक "णमोकार महामंत्र" इस अनादि-निधन मंत्र की केवल एक व्याख्या नहीं है, बल्कि यह इसके पीछे के गहन अध्यात्म और तर्क को उजागर करने वाली एक शोधपरक कृति है। पंडित जी ने इसमें यह सिद्ध किया है कि णमोकार मंत्र कोई जादुई मंत्र नहीं, बल्कि वीतरागता का विज्ञान है। पुस्तक की मुख्य विशेषताएं (Key Highlights): गुण-मुख्य भक्ति: भारिल्ल जी ने जोर दिया है कि यह मंत्र हमें 'व्यक्ति' से 'गुण' की ओर ले जाता है। हम किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि अरिहंत और सिद्ध जैसी 'अवस्थाओं' को नमस्कार करते हैं। यह संदेश देता है कि जो भी इन गुणों को प्रकट करेगा, वह पूज्य है। णमोकार मंत्र और वस्तु स्वातंत्र्य: लेखक ने इसे अपने प्रिय सिद्धांत 'वस्तु स्वातंत्र्य' से जोड़ा है। वे समझाते हैं कि जब हम "णमो" (नमस्कार) कहते हैं, तो हम वास्तव में उन गुणों की सराहना कर रहे होते हैं जो हमारी अपनी आत्मा में भी विद्यमान हैं। यह हमें पराधीनता से मुक्त कर स्वावलंबन की ओर ले जाता है। भ्रांति निवारण: अक्सर लोग णमोकार मंत्र का जाप सांसारिक इच्छाओं (पैसा, नौकरी, स्वास्थ्य) की पूर्ति के लिए करते हैं। भारिल्ल जी ने स्पष्ट किया है कि यह मंत्र 'पाप नाशक' है, न कि 'पुण्य की मांग' करने का साधन। इसका सच्चा फल कषायों की मंदता और आत्म-शांति है। पाँचों पदों का क्रम: उन्होंने तार्किक ढंग से समझाया है कि क्यों अरिहंत भगवान को सिद्धों से पहले रखा गया है (चूँकि वे हमें मार्ग बताते हैं) और कैसे ये पाँचों पद हमारे लिए 'आदर्श' (Role Models) हैं। ध्यान की विधि: पुस्तक में मंत्र के जाप की विधि के साथ-साथ उसके अर्थ के चिंतन पर अधिक बल दिया गया है। बिना अर्थ समझे करोड़ों बार जाप करने से बेहतर है, एक बार भावपूर्वक चिंतन करना।

Language
Hindi

Topics

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