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क्षत्रचूड़ामणि परिशीलन (Kshatra Chudamani Parishilan) आध्यात्मिक रत्नकर पण्डित रतनचन्दजी भारिल्ल (बड़े दादा) द्वारा लिखित एक अत्यंत प्रेरणादायक कृति है। यह पुस्तक आचार्य वादीभसिंह सूरी द्वारा रचित मूल संस्कृत काव्य 'क्षत्रचूड़ामणि' (जीवंधर चरित्र) का एक गहन अध्ययन और सरल व्याख्या है।
'परिशीलन' की विशेषताएँ: नीति और अध्यात्म का संगम: मूल ग्रंथ में जीवन के व्यावहारिक नीति-वचनों के साथ-साथ आध्यात्मिक सिद्धांतों का सुंदर मिश्रण है। पण्डित रतनचन्द जी ने अपनी व्याख्या में इन नीति सूत्रों को बहुत ही सरल भाषा में समझाया है। जीवंधर कुमार का चरित्र: यह ग्रंथ हमें बताता है कि कैसे एक क्षत्रिय कुमार (जीवंधर) ने अपनी योग्यता और पराक्रम से प्रतिकूल परिस्थितियों पर विजय प्राप्त की और अंततः संसार की असारता को जानकर मुनि दीक्षा लेकर मोक्ष प्राप्त किया। सरल भाषा: संस्कृत के कठिन श्लोकों और उनके भावों को हिंदी भाषी पाठकों के लिए सुलभ बनाना इस परिशीलन का मुख्य उद्देश्य है। दार्शनिक गहराई: भारिल्ल जी ने इसमें केवल कहानी ही नहीं सुनाई, बल्कि हर मोड़ पर जैन धर्म के सिद्धांतों (जैसे कर्म सिद्धांत, वस्तु स्वातंत्र्य) को भी गहराई से पिरोया है।
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