Cover of जिनपूजन रहस्य
Bhakti & Worship

जिनपूजन रहस्य

Jinpujan Rahasya

by Pt. Ratan Chand Bharill

4approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

जिनपूजन रहस्य (Jin Pujan Rahasya) पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक बहुत ही तार्किक और मार्गदर्शक पुस्तक है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए लिखी गई है जो मंदिर में पूजन तो करते हैं, लेकिन उसके पीछे के गहरे आध्यात्मिक उद्देश्य और भावों को नहीं समझ पाते। भारिल्ल जी ने इसमें क्रियाकांड (Rituals) से अधिक भाव-विशुद्धि पर जोर दिया है। इस पुस्तक के मुख्य रहस्य (Key Insights): पूजन का वास्तविक उद्देश्य: हम भगवान की पूजा उन्हें प्रसन्न करने के लिए नहीं, बल्कि उनके जैसे गुणों को अपने भीतर प्रकट करने के लिए करते हैं। जैन दर्शन में भगवान 'वीतरागी' हैं, वे न किसी से प्रसन्न होते हैं और न दुखी। अष्ट द्रव्य का आध्यात्मिक अर्थ: भारिल्ल जी ने पूजन में चढ़ाए जाने वाले आठों द्रव्यों (जल, चंदन, अक्षत आदि) का प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक अर्थ समझाया है। जैसे: अक्षत: अक्षय पद (मोक्ष) की प्राप्ति के लिए। पुष्प: काम-विजेता बनने के लिए। दीप: ज्ञान का प्रकाश जगाने के लिए। निश्चय और व्यवहार पूजन: पुस्तक स्पष्ट करती है कि असली पूजा भगवान के गुणों का चिंतन और अपनी शुद्ध आत्मा में लीन होना है (निश्चय पूजन)। बाहरी क्रियाएँ केवल उस लक्ष्य तक पहुँचने का साधन हैं (व्यवहार पूजन)। भ्रांति निवारण: कई लोग पूजन को केवल एक मांगलिक क्रिया या सांसारिक लाभ (पुण्य) का जरिया मानते हैं। भारिल्ल जी ने तर्कों से बताया है कि पूजन का फल वीतराग भाव की वृद्धि होना चाहिए, न कि भौतिक सुखों की कामना। सामूहिक vs व्यक्तिगत पूजन: उन्होंने पूजन की पद्धति और उसमें एकाग्रता बनाए रखने के व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं।

Language
Hindi

Topics

MantraTattvagyan