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जम्बू से जम्बूस्वामी (Jambu se Jambuswami) पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक बहुत ही सुंदर और प्रेरक ऐतिहासिक उपन्यास (Historical Novel) है। यह पुस्तक अंतिम केवली जम्बूस्वामी के जीवन चरित्र पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक अत्यधिक वैभवशाली और सुंदर राजकुमार 'जम्बू' सांसारिक सुखों को त्यागकर 'जम्बूस्वामी' (एक वीतरागी संत) बने। इस कृति की मुख्य विशेषताएं: कथानक का प्रारंभ: कहानी जम्बू कुमार के विवाह के प्रसंग से शुरू होती है। उनका विवाह आठ अत्यंत सुंदर कन्याओं के साथ हुआ था, और वे सभी उनके साथ संसार भोगने की प्रतीक्षा कर रही थीं। वैराग्य का प्रसंग: विवाह की पहली ही रात को प्रसिद्ध चोर विद्युच्चर जम्बू कुमार के महल में चोरी करने आता है। जम्बू कुमार उसे पकड़ने के बजाय उसे और अपनी रानियों को जीवन की अनित्यता और आत्मा के स्वरूप के बारे में उपदेश देते हैं। अंतिम अनुबद्ध केवली: जम्बूस्वामी भगवान महावीर की परंपरा के अंतिम केवली (Omniscient) थे। उनके बाद केवल-ज्ञान का मार्ग बंद हो गया (पंचम काल के प्रभाव से)। इस पुस्तक में उनके केवल-ज्ञान और निर्वाण की गौरवशाली यात्रा का वर्णन है। लेखन शैली: भारिल्ल जी ने इसे एक उपन्यास का रूप दिया है, जिससे पाठक जम्बू कुमार के मानसिक संघर्ष और वैराग्य की गहराई को एक कहानी की तरह महसूस कर पाता है।
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