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यह पुस्तक "जैनत्व संस्कार" (भाग - 1, 2, 3, 4) का एक व्यापक संग्रह है, जिसे संजय सिद्धार्थी, इंदौर द्वारा संकलित और संयोजित किया गया है[cite: 1]। यह पुस्तक मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं में जैन धर्म के प्रति रुचि जागृत करने और उन्हें जीवन के नैतिक मूल्यों (संस्कारों) से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है[cite: 1]।
वेबसाइट के लिए इस पुस्तक का विवरण निम्नलिखित अनुभागों में व्यवस्थित किया जा सकता है:
यह पुस्तक 'ऑनलाइन जैन बाल पाठशाला, इंदौर' की नवाचार शिक्षण पद्धति का हिस्सा है[cite: 1]। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को आधुनिक तकनीकों (जैसे सोशल मीडिया और इंटरनेट) के सदुपयोग के साथ-साथ दिगंबर जैन धर्म के प्राचीन सिद्धांतों से परिचित कराना है[cite: 1]। यह शिक्षा को "जीवंत और समयानुकूल" बनाने के लिए गतिविधियों और कहानियों का सहारा लेती है[cite: 1]।
| खंड | मुख्य विषय |
|---|---|
| प्रथम खंड | णमोकार मंत्र, चत्तारि मंगल, चौबीस तीर्थंकरों के नाम, जीव-अजीव की प्राथमिक पहचान और भगवान आदिनाथ का परिचय। |
| द्वितीय खंड | परमेष्ठी और भगवान में अंतर, देव-दर्शन की विधि, पापों का परिचय, भगवान महावीर का जीवन और आचार्य कुन्दकुन्द का परिचय। |
| तृतीय खंड | कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ), पंच परमेष्ठी के विस्तृत मूलगुण, छह द्रव्य, अष्ट मूलगुण और पंडित टोडरमल जी का परिचय। |
| चतुर्थ खंड | द्रव्य-गुण-पर्याय, सात तत्व, चार अभाव (प्रागभाव आदि) और ज्ञानी श्रावक के बारह व्रतों का सूक्ष्म विवेचन। |
प्रकाशक विवरण:
यह पुस्तक न केवल धार्मिक शिक्षा का आधार है, बल्कि यह बच्चों के चरित्र निर्माण और उन्हें एक आदर्श नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है।
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