
* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.
हरिवंशकथा (Harivansh Katha) पंडित रतनचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक लोकप्रिय धार्मिक उपन्यास (Religious Novel) है। यह मूल रूप से आचार्य जिनसेन द्वारा रचित 'हरिवंश पुराण' का आधुनिक हिंदी में सरल और सरस रूपांतरण है। भारिल्ल जी ने इसे एक कहानी की शैली में लिखा है ताकि आम पाठक जैन धर्म के इतिहास और महापुरुषों के चरित्र को आसानी से समझ सकें। पुस्तक के मुख्य आकर्षण: हरिवंश की उत्पत्ति: इसमें हरिवंश (यदुवंश) की उत्पत्ति और उनके गौरवशाली इतिहास का वर्णन है। नेमिनाथ और कृष्ण: इस कथा के मुख्य नायक 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ और उनके चचेरे भाई नारायण श्रीकृष्ण हैं। इसमें कृष्ण, बलराम और नेमिनाथ के बीच के अटूट प्रेम और उनके जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को बहुत भावपूर्ण ढंग से चित्रित किया गया है। महाभारत का जैन परिप्रेक्ष्य: यह पुस्तक महाभारत काल की घटनाओं को जैन दर्शन के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। इसमें कौरव-पांडवों के युद्ध, द्वारका दहन, और अंततः पांडवों के वैराग्य और मोक्ष गमन की कथा है। वैराग्य की प्रेरणा: भारिल्ल जी ने इसमें केवल युद्ध या राजनीति का वर्णन नहीं किया, बल्कि हर प्रसंग से 'वैराग्य' और 'कर्म सिद्धांत' को जोड़ा है। यह दिखाया गया है कि कैसे महान वैभवशाली राजा भी अंत में संसार की असारता को जानकर मुनि दीक्षा धारण करते हैं। सरल भाषा: आचार्य जिनसेन का मूल पुराण संस्कृत में है, जो काफी कठिन हो सकता है। भारिल्ल जी ने उसे एक उपन्यास की तरह रोचक बना दिया है, जिससे यह बच्चों और युवाओं के लिए भी पठनीय हो गया है।
Topics