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Cover of गोम्मटेश्वर बाहुबली
Prathmanuyog

गोम्मटेश्वर बाहुबली

Gommateshwar Bahubali

by Dr. Hukamchand Bharill

3approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

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ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

गोम्मटेश्वर बाहुबली (Gommateshwara Bahubali)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'गोम्मटेश्वर बाहुबली' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक गौरवशाली कृति है। यह पुस्तक प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के पुत्र बाहुबली के जीवन चरित्र, उनके महान त्याग, और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में स्थित विश्व की विशालतम अखंड प्रतिमा के इतिहास व अध्यात्म को समर्पित है।


2. मुख्य विषय और विवेचन (Key Highlights)

  1. बाहुबली का जीवन चरित्र: भरत और बाहुबली के बीच हुए युद्ध का वर्णन और वह क्षण जब बाहुबली को विजय के शिखर पर वैराग्य हुआ।
  2. अहंकार से मुक्ति: बाहुबली की एक वर्ष की खड्गासन तपस्या का मर्म। डॉ. साहब ने समझाया है कि कैसे "अहंकार" (Ego) ही वह अंतिम बेल थी जिसने उन्हें केवलज्ञान प्राप्त करने से रोक रखा था।
  3. मूर्तिकला और इतिहास: श्रवणबेलगोला की ५७ फीट ऊँची प्रतिमा का निर्माण, चामुण्डराय का योगदान और इस अद्भुत कलाकृति की वैज्ञानिक व ऐतिहासिक विशेषताएँ।
  4. महामस्तकाभिषेक: इस महोत्सव के आध्यात्मिक महत्व की व्याख्या। लेखक स्पष्ट करते हैं कि बाहरी अभिषेक का फल तभी है जब भीतर 'राग-द्वेष' का अभिषेक होकर शांति प्रकट हो।
  5. भरत-बाहुबली संवाद: युद्ध के मैदान में वैराग्य की वह अद्भुत चर्चा जो पाठक के हृदय को झकझोर देती है।

3. पुस्तक का आध्यात्मिक संदेश

डॉ. भारिल्ल इस पुस्तक में सिद्ध करते हैं कि:

"बाहुबली का चरित्र हमें सिखाता है कि सत्य की राह पर चलने के लिए अपनों से भी लड़ना पड़े तो पीछे न हटें, लेकिन अंततः विजय स्वयं को जीतने (अपनी कषायों को जीतने) में ही है।"


4. लेखन शैली

  • उपन्यास और इतिहास का संगम: यह पुस्तक तथ्यों के साथ-साथ एक कहानी की तरह प्रवाहमयी है।
  • तार्किक अध्यात्म: डॉ. साहब की विशिष्ट शैली में बाहुबली के वैराग्य को 'वस्तु स्वातंत्र्य' के आधार पर समझाया गया है।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: सरल, प्रभावशाली और गौरवमयी हिंदी।
  • उपयोगिता: तीर्थ यात्रियों, इतिहास प्रेमियों और वैराग्य के जिज्ञासुओं के लिए सर्वश्रेष्ठ।
  • डिजिटल लिंक: आप इसे Jain eBooks और Atma Dharma पर खोज सकते हैं।

6. संबंधित साहित्य

  • शलाका पुरुष (पूर्वार्द्ध): आदिनाथ और भरत-बाहुबली के विस्तृत वर्णन के लिए।
  • भरत का अन्तर्द्वन्द्व: चक्रवर्ती भरत के दृष्टिकोण को समझने के लिए।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Itihas