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Cover of धर्म के दशलक्षण
Charnanuyog

धर्म के दशलक्षण

Dharma Ke Dashlakshan

by Dr. Hukamchand Bharill

30approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

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ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

धर्म के दश लक्षण (Dharma Ke Dash-Lakshan)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'धर्म के दश लक्षण' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी की एक अत्यंत लोकप्रिय और कालजयी कृति है। यह पुस्तक आचार्य उमास्वामी कृत 'तत्त्वार्थ सूत्र' के आधार पर धर्म के दस लक्षणों (उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य) की सूक्ष्म व्याख्या करती है। डॉ. साहब ने इसे 'पर्युषण पर्व' के उपदेशों के रूप में तैयार किया है।


2. मुख्य वैचारिक बिंदु (Key Highlights)

  1. स्वभाव ही धर्म है: डॉ. साहब का मुख्य तर्क है— "वत्थु सहावो धम्मो" (वस्तु का स्वभाव ही धर्म है)। क्रोध आदि विभाव हैं, और क्षमा आदि आत्मा के वास्तविक स्वभाव हैं।
  2. उत्तम शब्द का महत्व: प्रत्येक लक्षण के साथ लगे 'उत्तम' शब्द का अर्थ डॉ. साहब ने 'सम्यग्दर्शन' के साथ जोड़कर स्पष्ट किया है। बिना आत्म-ज्ञान के की गई क्षमा केवल 'लोक-व्यवहार' है, जबकि आत्म-ज्ञान सहित क्षमा 'धर्म' है।
  3. मनोवैज्ञानिक विश्लेषण:
    • क्षमा: केवल सहना नहीं, बल्कि शत्रु में भी भगवान देखना।
    • मार्दव: मान (अहंकार) का अभाव।
    • आर्जव: मन-वचन-काय की एकता (सरलता)।
    • आकिंचन्य: "पर-द्रव्य मेरा नहीं है" – इस बोध के साथ पूर्ण निर्ममत्व भाव।
  4. क्रियाकांड बनाम परिणाम: पुस्तक का जोर बाहरी उपवास या अनुष्ठानों के बजाय आंतरिक परिणामों (भावों) की शुद्धि पर है।
  5. वस्तु स्वातंत्र्य: दशधर्मों के पालन को डॉ. साहब ने 'वस्तु स्वातंत्र्य' के सिद्धांत से जोड़ा है, जिससे पाठक को सहज ही शांति का अनुभव होता है।

3. पुस्तक का आध्यात्मिक संदेश

डॉ. भारिल्ल इस पुस्तक में स्पष्ट करते हैं:

"धर्म साल में दस दिन मनाने का कोई उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्मा का वह शीतल स्वभाव है जिसे प्रकट करके ही जीव सुखी हो सकता है। क्रोध की आग में जलती दुनिया के लिए 'क्षमा' ही एकमात्र औषधि है।"


4. पठन शैली और लोकप्रियता

  • प्रवचन शैली: यह पुस्तक डॉ. साहब के १० दिनों के प्रवचनों का संकलन है, जिससे पढ़ते समय ऐसा अनुभव होता है मानो वे साक्षात् सामने बैठकर समझा रहे हों।
  • तार्किक और स्पष्ट: जटिल दार्शनिक गुत्थियों को बहुत ही सरल उदाहरणों (जैसे सुनार, मिट्टी, या दैनिक घटनाओं) से सुलझाया गया है।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: ओजस्वी, तार्किक और मर्मस्पर्शी हिंदी।
  • उपयोगिता: पर्युषण पर्व के स्वाध्याय, प्रवचनों और व्यक्तिगत आत्म-सुधार के लिए सर्वश्रेष्ठ।
  • डिजिटल लिंक: यह Atma Dharma और Jain eBooks पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • दश लक्षण धर्म (पंडित रतनचंद भारिल्ल): इसी विषय पर अन्य सरल व्याख्या।
  • बारह भावना: वैराग्य के चिंतन हेतु।
  • सामान्य श्रावकाचार: दैनिक आचरण की शुद्धि हेतु।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Lifestyle