
Dashlakshan dharm deshna
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📘 दशलक्षण धर्म देशना
आदरणीय बाल ब्रह्मचारी रविन्द्र जी आत्मन् के आत्मा के क्षमा आदि दशलक्षण धर्मों पर विभिन्न वर्षों में किए गए प्रवचनों का एक संकलन है। जिसे एक सधर्मी भाई द्वारा अक्षरशः लिपिबद्ध किया गया है।
बाल ब्रह्मचारी जी का दशलक्षण धर्मों पर यह चिंतन अन्य विद्वानों से भिन्न प्रतीत होने पर भी उसी आध्यात्मिक प्रवाह को लिए हुए है, जो मुमुक्षु साधकों के परिणामों की विशुद्धि में निमित्त बनने के साथ-साथ पर्वों के दिनों में प्रवचन करने वाले विद्वानों को भी एक नई चिंतन-धारा प्रदान करेगा।
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