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Dravyanuyog

चिन्तन की गहराइयाँ

Chintan Ki Gehraiyan

by Dr. Hukamchand Bharill

30approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

चिन्तन की गहराइयाँ (Chintan Ki Gehraiyan)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'चिन्तन की गहराइयाँ' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी की एक अत्यंत गंभीर और वैचारिक कृति है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह पुस्तक पाठक को अध्यात्म के उन गहरे धरातलों पर ले जाती है जहाँ केवल 'जानना' शेष रह जाता है। इसमें सतही धार्मिक मान्यताओं के बजाय 'तत्व-चिंतन' की सूक्ष्मताओं पर बल दिया गया है।


2. मुख्य वैचारिक बिंदु (Key Highlights)

  1. स्व-सम्मुखता का मार्ग: पुस्तक का मुख्य स्वर यह है कि जब तक हमारा चिंतन बाहर की दुनिया (पर) में उलझा है, तब तक हम अशांत हैं। असली शांति चिंतन की दिशा 'स्व' (आत्मा) की ओर मोड़ने में है।
  2. तर्क और अनुभव का मेल: डॉ. साहब ने इसमें केवल भावना की बात नहीं की, बल्कि 'न्याय' (Logic) के माध्यम से सिद्ध किया है कि आत्मा का अनुभव क्यों और कैसे आवश्यक है।
  3. गहन भेद-विज्ञान: शरीर, कषाय और चैतन्य के बीच जो सूक्ष्म अंतर है, उसे चिन्तन के स्तर पर कैसे पकड़ा जाए—इसका बहुत ही सूक्ष्म विश्लेषण इसमें मिलता है।
  4. संसार की असारता: १२ भावनाओं के चिंतन को एक नए और तार्किक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है, जो मात्र वैराग्य ही नहीं, बल्कि 'आत्म-वैभव' का भी दर्शन कराता है।
  5. एकाग्रता और लीनता: ध्यान की गहराई में उतरने के लिए किन विचारों का आलंबन लेना चाहिए और कैसे 'विकल्पों' से 'निर्विकल्पता' की ओर बढ़ना चाहिए, इसका सुंदर मार्गदर्शन है।

3. पुस्तक का आध्यात्मिक मर्म

डॉ. भारिल्ल इस पुस्तक में एक क्रांतिकारी विचार देते हैं:

"चिन्तन का फल केवल जानकारी बढ़ाना नहीं है, बल्कि चिन्तन का अंतिम लक्ष्य 'चिन्तन' से मुक्त होकर अपने शुद्ध स्वरूप में लीन होना है।"


4. लेखन शैली

  • सूक्ष्म और विश्लेषणात्मक: यह पुस्तक डॉ. साहब की सबसे गंभीर कृतियों में से एक मानी जाती है।
  • चिंतन प्रधान: इसमें छोटे-छोटे लेख हैं जो पाठक को पढ़ने के बाद घंटों सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: शुद्ध, परिमार्जित और गंभीर हिंदी।
  • उपयोगिता: उन मुमुक्षुओं के लिए जो स्वाध्याय में गहराई (Deep Study) चाहते हैं।
  • डिजिटल लिंक: यह Atma Dharma और Jain eBooks पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • बिन्दु में सिन्धु: संक्षिप्त आध्यात्मिक सूत्रों के लिए।
  • ध्यान का स्वरूप: ध्यान की प्रक्रिया को समझने हेतु।
  • द्रव्य दृष्टि: वस्तु को उसके मूल स्वरूप में देखने के लिए।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Tattvagyan