Cover of छहढाला (मूल)
Dravyanuyog

छहढाला (मूल)

Chhahdhala (Mool)

by Pt. Daulatram

5approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

छहढाला (Chhahdhala) जैन धर्म का एक अत्यंत लोकप्रिय और लघु ग्रंथ है, जिसे पंडित दौलतराम जी ने 19वीं शताब्दी (विक्रम संवत 1891) में रचा था। इसे "जैन धर्म की वर्णमाला" या "गागर में सागर" कहा जाता है क्योंकि यह बहुत कम शब्दों में संपूर्ण जैन दर्शन को समेटे हुए है। मुख्य विशेषताएं: नाम का अर्थ: 'छह' का अर्थ है 6 और 'ढाला' का अर्थ है ढाल (जैसे युद्ध में ढाल रक्षा करती है, वैसे ही ये अध्याय संसार के दुखों से रक्षा करते हैं)। इसमें कुल 6 अध्याय या 'ढालें' हैं। छंद: यह सरल हिंदी (ब्रज/खड़ी बोली) के पद्य रूप में है, जिसे आसानी से गाया और याद किया जा सकता है। आधार: यह ग्रंथ मुख्य रूप से आचार्य कुन्दकुन्द के अध्यात्म और आचार्य उमास्वामी के 'तत्त्वार्थ सूत्र' के सिद्धांतों पर आधारित है।

Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

TattvagyanDravya