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Charnanuyog

बिखरे मोती

Bikhre Moti

by Dr. Hukamchand Bharill

16approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

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ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

बिखरे मोती (Bikhre Moti)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'बिखरे मोती' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी के आध्यात्मिक प्रवचनों, लेखों और चिंतन के क्षणों में निकले हुए 'सूक्ति-वाक्यों' (Aphorisms) का एक सुंदर संकलन है। जिस प्रकार बिखरे हुए मोतियों को एक धागे में पिरोकर सुंदर माला बनती है, उसी प्रकार जीवन के विभिन्न पहलुओं पर उनके क्रांतिकारी विचारों को इस पुस्तक में सहेजा गया है।


2. मुख्य वैचारिक बिंदु (Key Highlights)

  1. संक्षिप्त और सारगर्भित: इस पुस्तक में लंबे लेखों के बजाय एक-दो पंक्तियों के 'पावरफुल' विचार हैं, जो सीधे पाठक के हृदय पर चोट करते हैं।
  2. दृष्टि परिवर्तन: इसका प्रत्येक 'मोती' (वाक्य) हमारी मिथ्या मान्यताओं को तोड़कर सम्यक दृष्टि (Right Perspective) विकसित करने में सहायक है।
  3. वस्तु स्वातंत्र्य का पोषण: भारिल्ल जी ने इसमें बहुत ही सरल ढंग से समझाया है कि "प्रत्येक द्रव्य अपनी मर्यादा में स्वतंत्र है, कोई किसी का कुछ कर नहीं सकता।"
  4. अध्यात्म और व्यवहार: इसमें केवल वैराग्य की बातें ही नहीं, बल्कि एक मोक्षमार्गी जीव का लौकिक व्यवहार और उसकी नैतिकता कैसी होनी चाहिए, इस पर भी मार्मिक विचार हैं।
  5. अनुभव की वाणी: ये विचार मात्र किताबी ज्ञान नहीं हैं, बल्कि डॉ. साहब के स्वयं के आत्म-मंथन और भेद-विज्ञान के अभ्यास का निचोड़ हैं।

3. पुस्तक से कुछ 'अनमोल मोती' (Examples)

डॉ. साहब के कुछ प्रसिद्ध विचार जो इस पुस्तक की शोभा बढ़ाते हैं:

"पर का लक्ष्य ही दुख है, और स्वयं का आश्रय ही सुख है।"
"दुनिया को सुधारने का विकल्प ही सबसे बड़ा बिगाड़ है; खुद को जान लेना ही असली सुधार है।"
"जो होना है वही होता है—यह कायरता नहीं, वस्तु स्थिति का स्वीकार है।"


4. उपयोगिता और पठन शैली

  • दैनिक चिंतन: यह पुस्तक प्रतिदिन सुबह या रात को सोने से पहले एक-दो विचार पढ़ने और उन पर मनन करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
  • सोशल मीडिया और डायरी: इसके विचार इतने प्रभावशाली हैं कि पाठक अक्सर इन्हें अपनी डायरी में नोट करते हैं या दूसरों के साथ साझा करते हैं।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: सरल, तार्किक और अत्यंत प्रभावशाली हिंदी।
  • उपयोगिता: सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए जो कम समय में जीवन का बड़ा सच समझना चाहते हैं।
  • डिजिटल लिंक: यह Atma Dharma और Jain eBooks पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • गागर में सागर: इसी प्रकार के संक्षिप्त विचारों का अन्य संग्रह।
  • बिन्दु में सिन्धु: आध्यात्मिक सूत्रों का संकलन।
  • ये तो सोचा ही नहीं: वैचारिक क्रांति लाने वाली पुस्तक।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

NitiVakya