JinWaniजिनवाणी
HomeBrowsePublishersPDF SitesAbout
Join as Publisher
Menu
HomeBrowse BooksView PublishersPDF SitesAboutPublisher Login
Join as Publisher

JinWani

A non-profit digital initiative to make physical Jain literature accessible by bridging the gap between readers and publishers.

HomePublishers DirectoryPublisher LoginJoin as PublisherPDF Sites ListAbout UsContact

Legal

Terms of ServicePrivacy PolicyUser Manual

Connect

FacebookFacebookYouTubeYouTubeTelegramTelegramXXInstagramInstagram JinSwara

Disclaimer: Information on this website is shared by respective publishers. While we strive to keep details accurate and up to date, Jinwani by JinSwara cannot guarantee the completeness or accuracy of publisher-provided information.

© 2026 JinWani. All rights reserved.

Back to Search
Cover of भगवान महावीर और उनकी जन्मभूमि
Prathmanuyog

भगवान महावीर और उनकी जन्मभूमि

Bhagwan Mahavir Aur Unki Janmabhoomi

by Dr. Hukamchand Bharill

3approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Request on WhatsAppDirect Call
ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

भगवान महावीर और उनकी जन्मभूमि (Bhagwan Mahaveer aur Unki Janmabhoomi)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'भगवान महावीर और उनकी जन्मभूमि' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और शोधपरक कृति है। यह पुस्तक विशेष रूप से भगवान महावीर के जन्मस्थान 'कुण्डलपुर' (वैशाली, बिहार) की ऐतिहासिकता, वहां की भौगोलिक स्थिति और उस पावन भूमि से जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों को सप्रमाण प्रस्तुत करती है।


2. मुख्य विषय और विवेचन (Key Highlights)

  1. जन्मभूमि का ऐतिहासिक साक्ष्य: डॉ. साहब ने प्राचीन आगमों, शिलालेखों और ऐतिहासिक ग्रंथों के आधार पर यह सिद्ध किया है कि वैशाली (बिहार) के निकट स्थित कुण्डलपुर ही महावीर की वास्तविक जन्मभूमि है।
  2. कुण्डलपुर का गौरव: लिच्छवी गणराज्य की महिमा, राजा सिद्धार्थ और माता त्रिशला के महल का वर्णन, और उस समय के वैभवशाली परिवेश का चित्रण।
  3. बाल्यकाल के संस्कार: जन्मभूमि के वातावरण का राजकुमार वर्धमान के वैराग्य और उनके निडर व्यक्तित्व के निर्माण में क्या योगदान था, इस पर गहरा विश्लेषण।
  4. तीर्थ रक्षा का संकल्प: इस पुस्तक का एक मुख्य उद्देश्य समाज को अपनी प्राचीन धरोहरों और जन्मभूमि जैसे महान तीर्थों के प्रति जागरूक करना और उनके संरक्षण की प्रेरणा देना है।
  5. पर्यटन बनाम तीर्थ: लेखक ने स्पष्ट किया है कि जन्मभूमि केवल दर्शन करने का स्थान नहीं है, बल्कि वह महावीर के 'जियो और जीने दो' के संदेश को हृदयंगम करने की प्रयोगशाला है।

3. पुस्तक की विशेषताएँ

  • तथ्यात्मक प्रमाण: इसमें केवल पौराणिक कथाएँ नहीं, बल्कि पुरातात्विक और ऐतिहासिक प्रमाणों का समावेश है।
  • भावपूर्ण चित्रण: कुण्डलपुर की वंदना करते समय एक मुमुक्षु के मन में क्या भाव होने चाहिए, इसका डॉ. भारिल्ल ने बहुत ही मार्मिक वर्णन किया है।
  • सरल और ओजस्वी भाषा: डॉ. साहब की विशिष्ट शैली में ऐतिहासिक तथ्यों को भी बहुत रोचक और पठनीय बनाया गया है।

4. पुस्तक का आध्यात्मिक संदेश

भारिल्ल जी इस पुस्तक में लिखते हैं:

"वह भूमि धन्य है जहाँ स्वयं परमात्मा ने जन्म लिया, लेकिन सच्ची तीर्थ वंदना तभी सार्थक है जब हम अपने भीतर भी उस 'परमात्मा' को जन्म देने का पुरुषार्थ करें।"


5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: सुबोध, तार्किक और गौरवमयी हिंदी।
  • उपयोगिता: तीर्थ यात्रियों, इतिहास के शोधार्थियों और महावीर के अनुयायियों के लिए अनिवार्य ग्रंथ।
  • डिजिटल लिंक: Jain eBooks और Atma Dharma पर उपलब्ध।

6. संबंधित साहित्य

  • तीर्थंकर भगवान महावीर: महावीर के संपूर्ण जीवन चरित्र के लिए।
  • शाश्वत तीर्थधाम सम्मेदशिखर: अन्य महान जैन तीर्थ के वर्णन हेतु।
  • वीतरागी व्यक्तित्व: महावीर के आंतरिक स्वरूप को समझने के लिए।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Story