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Cover of बारह भावना एवं जिनेन्द्र वंदना
Bhakti & Worship

बारह भावना एवं जिनेन्द्र वंदना

Barah Bhavna Evam Jinendra Vandana

by Dr. Hukamchand Bharill

2approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

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ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

बारह भावना एवं जिनेन्द्र वंदना (Barah Bhavana evam Jinendra Vandana)

रचनाकार: विभिन्न प्राचीन एवं आधुनिक कवि (जैसे पं. दौलतराम जी, पं. जयचन्द जी छाबड़ा)
संपादक/व्याख्या: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

यह पुस्तक जैन श्रावकों के दैनिक स्वाध्याय और चिंतन के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका है। इसमें वैराग्य को पुष्ट करने वाली 'बारह भावनाएं' और वीतराग भाव जगाने वाली 'जिनेन्द्र वंदना' (भक्ति) का संकलन किया गया है। डॉ. भारिल्ल जी ने इसमें भावों की शुद्धि और सिद्धांतों की स्पष्टता पर विशेष बल दिया है।


2. मुख्य विषय (Key Sections)

क. बारह भावना (Twelve Reflections)

संसार की असारता और आत्मा की महिमा को समझने के लिए १२ चिंतन के विषय:

  1. अनित्य: सब कुछ नाशवान है।
  2. अशरण: मृत्यु के समय कोई शरण नहीं।
  3. संसार: गतियों में भटकने का दुख।
  4. एकत्व: आत्मा अकेला ही है।
  5. अन्यत्व: शरीर और आत्मा भिन्न हैं।
  6. अशुचि: देह अपवित्र है।
  7. आस्रव: कर्म आने के द्वार।
  8. संवर: कर्मों को रोकना।
  9. निर्जरा: कर्मों का क्षय।
  10. लोक: ब्रह्मांड का स्वरूप।
  11. बोधिसुलभ: रत्नत्रय की दुर्लभता।
  12. धर्म: दयामयी धर्म का स्वरूप।

ख. जिनेन्द्र वंदना (Jinendra Vandana)

  • स्तुति और भक्ति: भगवान जिनेन्द्र के गुणों का वर्णन करने वाले विभिन्न स्तोत्र।
  • वीतरागता का पोषण: वंदना का उद्देश्य किसी सांसारिक वरदान की मांग नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के 'भगवान' को जगाना है।
  • दैनिक पाठ: इसमें प्रतिदिन मंदिर में बोले जाने वाले पाठों का शुद्ध और प्रामाणिक रूप दिया गया है।

3. पुस्तक की विशेषताएँ

  • दार्शनिक गहराई: यह केवल शब्दों का पाठ नहीं है, बल्कि प्रत्येक पंक्ति में 'निश्चय' और 'भेद-विज्ञान' का मर्म छिपा है।
  • सरल अनुवाद: जहाँ पंक्तियाँ कठिन हैं, वहाँ डॉ. भारिल्ल ने सरल अर्थ और भावार्थ प्रदान किए हैं।
  • वैराग्य की जननी: बारह भावनाओं का चिंतन वैराग्य उत्पन्न करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

4. पद्यानुवाद की एक बानगी

"संसार महादुख सागर है, सुख का इसमें लवलेश नहीं।"
"निज आतम ही सुख सागर है, इसमें दुख का प्रवेश नहीं ॥"


5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: हिंदी (ब्रज और खड़ी बोली) एवं प्राकृत/संस्कृत के अंश।
  • उपयोगिता: पूजा, सामायिक, और रात्रि चिंतन (Bedtime reflection) के लिए।
  • डिजिटल लिंक: Jain eBooks और Atma Dharma पर उपलब्ध।

6. संबंधित साहित्य

  • वैराग्य भावना: संसार से विरक्ति जगाने वाले पद।
  • स्तुति संग्रह: विभिन्न आचार्यों कृत भक्ति पाठ।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

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