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Dravyanuyog

बारह भावना : एक अनुशीलन

Barah Bhavna : Ek Anushilan

by Dr. Hukamchand Bharill

20approx.

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Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

Description

बारह भावना : एक अनुशीलन (Barah Bhavana: Ek Anushilan)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'बारह भावना : एक अनुशीलन' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी की एक अत्यंत गंभीर और दार्शनिक कृति है। सामान्यतः बारह भावनाओं को केवल 'वैराग्य' या 'संसार से दुख' के रूप में देखा जाता है, लेकिन डॉ. साहब ने इस अनुशीलन में यह सिद्ध किया है कि ये भावनाएँ वास्तव में 'आत्म-वैभव' को पहचानने और 'भेद-विज्ञान' का अभ्यास करने की वैज्ञानिक विधियाँ हैं।


2. मुख्य वैचारिक बिंदु (Key Highlights)

  1. चिंतन की वैज्ञानिक पद्धति: डॉ. साहब ने स्पष्ट किया है कि 'अनित्य' का अर्थ केवल रोना नहीं है कि सब छूट रहा है, बल्कि यह जानना है कि "जो बदल रहा है वह मैं नहीं हूँ, मैं तो ध्रुव (परिवर्तन रहित) आत्मा हूँ।"
  2. निश्चय और व्यवहार का संतुलन: पुस्तक में प्रत्येक भावना (जैसे एकत्व, अन्यत्व, अशुचि आदि) का विश्लेषण दो दृष्टिकोणों से किया गया है:
    • व्यवहार: संसार की असारता दिखाना।
    • निश्चय: आत्मा की पूर्णता और शुद्धता का दर्शन कराना।
  3. भ्रांति निवारण: कई लोग वैराग्य को 'निराशावाद' (Pessimism) मानते हैं। भारिल्ल जी तर्क देते हैं कि सच्ची बारह भावनाएँ जीव को दुखी नहीं, बल्कि 'निराकुल' (Fearless) बनाती हैं।
  4. प्राचीन कवियों के पदों का समावेश: डॉ. साहब ने पंडित दौलतराम जी और अन्य कवियों की बारह भावनाओं की पंक्तियों का उपयोग करते हुए उनका गहरा आध्यात्मिक मर्म (Essence) उजागर किया है।
  5. मोक्षमार्ग का आधार: ये भावनाएँ सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति और स्थिरता के लिए अनिवार्य चिंतन हैं।

3. पुस्तक का आध्यात्मिक सार

डॉ. भारिल्ल इस अनुशीलन में समझाते हैं:

"बारह भावनाओं का चिंतन पर-द्रव्य से मोह छुड़ाने के लिए है, ताकि जीव अपने 'स्व-द्रव्य' (आत्मा) में लीन हो सके। अन्यत्व भावना शरीर से अलग करती है, तो एकत्व भावना अपनी आत्मा से जोड़ती है।"


4. पठन शैली और उपयोगिता

  • गहन विश्लेषण: यह पुस्तक केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि सामायिक और ध्यान के समय मनन करने के लिए एक 'गाइड' है।
  • तार्किक भाषा: डॉ. साहब की विशिष्ट शैली में वैराग्य के हर पक्ष को न्याय की कसौटी पर कसा गया है।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: शुद्ध, तार्किक और मर्मस्पर्शी हिंदी।
  • उपयोगिता: मुमुक्षुओं, साधकों और वैराग्य के अभिलाषी पाठकों के लिए सर्वश्रेष्ठ।
  • डिजिटल लिंक: यह Atma Dharma और Jain eBooks पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • वैराग्य महाकाव्य: इन्हीं भावनाओं का काव्यात्मक चित्रण।
  • समाधि का सार: जीवन के अंतिम समय में इन भावनाओं की उपयोगिता हेतु।
  • नींव का पत्थर: वस्तु स्वातंत्र्य के परिप्रेक्ष्य में वैराग्य हेतु।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

Vairagya