आत्मा ही है शरण (Atma Hi Hai Sharan)
लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर
1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय
'आत्मा ही है शरण' डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी द्वारा लिखित एक अत्यंत प्रेरणादायी और वैराग्यपरक कृति है। यह पुस्तक जीव को बाहरी अवलंबनों (जैसे—धन, परिवार, देव-देवी) की तलाश छोड़कर अपने वास्तविक आश्रय, यानी अपनी 'शुद्ध आत्मा' की ओर मुड़ने की प्रेरणा देती है। इसका मुख्य स्वर यह है कि विश्व में कोई भी 'पर' पदार्थ आत्मा को स्थायी शरण नहीं दे सकता।
2. मुख्य वैचारिक बिंदु (Key Highlights)
- शरण का वास्तविक अर्थ: डॉ. साहब तर्क देते हैं कि जिसे हम आज 'शरण' मान रहे हैं (जैसे शरीर या संपत्ति), वह स्वयं ही विनाशी है। जो स्वयं सुरक्षित नहीं, वह दूसरों को क्या शरण देगा? वास्तविक शरण केवल 'त्रैकालिक शुद्ध आत्मा' ही है।
- अशरण भावना का प्रयोग: बारह भावनाओं में से 'अशरण भावना' का उद्देश्य जीव को डराना नहीं, बल्कि उसे यह समझाना है कि मृत्यु के समय धर्म और आत्मा के अलावा कोई रक्षक नहीं है।
- पराधीनता से मुक्ति: पुस्तक का जोर इस बात पर है कि जब तक हम बाहरी व्यक्तियों या परिस्थितियों से सुख की उम्मीद करते हैं, तब तक हम पराधीन हैं। स्वाधीनता केवल अपनी आत्मा की शरण लेने में है।
- भगवान भी शरण नहीं?: डॉ. साहब ने एक क्रांतिकारी स्पष्टीकरण दिया है कि भगवान (अरिहंत) केवल 'बताने वाले' हैं, वे शरण नहीं हैं। उनकी बताई हुई 'वीतरागी राह' और उस राह पर चलकर अपनी आत्मा को पहचानना ही असली शरण है।
- निर्भयता की प्राप्ति: जब जीव को यह विश्वास हो जाता है कि उसका अपना स्वभाव ही उसकी सबसे बड़ी सुरक्षा है, तो वह मृत्यु और वियोग के भय से मुक्त हो जाता है।
3. पुस्तक का आध्यात्मिक मर्म
डॉ. भारिल्ल इस पुस्तक के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि:
"बाहर खोजा तो दुख पाया, भीतर देखा तो भगवान पाया। यह आत्मा ही स्वयं का सबसे बड़ा मित्र है और यही एकमात्र शाश्वत शरण है।"
4. लेखन शैली
- मर्मस्पर्शी और तार्किक: डॉ. साहब ने बहुत ही सरल उदाहरणों से 'शरण' के भ्रम को तोड़ा है।
- चिंतन प्रधान: यह पुस्तिका सामायिक और शांत वातावरण में मनन करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
5. संदर्भ और उपलब्धता
- भाषा: सरल, प्रभावशाली और मर्मस्पर्शी हिंदी।
- उपयोगिता: उन सभी मुमुक्षुओं के लिए जो मानसिक अशांति और असुरक्षा के भाव से मुक्त होना चाहते हैं।
- डिजिटल लिंक: यह Jain eBooks और Atma Dharma पर उपलब्ध है।
6. संबंधित साहित्य
- बारह भावना : एक अनुशीलन: शरण और अन्य भावनाओं के विस्तृत विवेचन हेतु।
- विदाई की बेला: मृत्यु के समय आत्मा की शरण लेने की कला।
- ये तो सोचा ही नहीं: मान्यताओं में बदलाव लाने हेतु।