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Cover of अष्टपाहुड़ पद्यानुवाद
Charnanuyog

अष्टपाहुड़ पद्यानुवाद

Ashtapahud Padyanuvad

by Dr. Hukamchand Bharill

3approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

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ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

अष्टपाहुड़ पद्यानुवाद (Ashtapahud Padyanuvad)

मूल रचना: आचार्य कुन्दकुन्ददेव (प्राकृत गाथाएँ)
पद्यानुवाद: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

'अष्टपाहुड़' आचार्य कुन्दकुन्ददेव द्वारा रचित आठ महत्वपूर्ण पाहुड़ों (अध्यायों) का संग्रह है। इसमें सम्यक्त्व, शील, और मुनि धर्म का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन है। डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी ने इसकी 500 से अधिक प्राकृत गाथाओं का सरल और मधुर हिंदी पद्यानुवाद किया है, जिससे कुन्दकुन्द के सिद्धांतों को गुनगुनाना और हृदयंगम करना आसान हो गया है।


2. आठ पाहुड़ों का संक्षिप्त सार (Key Highlights)

  1. दर्शन पाहुड़: सम्यग्दर्शन (सही दृष्टि) की महिमा और उसके स्वरूप का वर्णन।
  2. सूत्र पाहुड़: आगम (शास्त्रों) के अध्ययन और उनकी प्रामाणिकता का महत्व।
  3. चारित्र पाहुड़: श्रावक और मुनि के सम्यक् चारित्र का विवेचन।
  4. बोध पाहुड़: देव-शास्त्र-गुरु और तीर्थों के वास्तविक स्वरूप का बोध।
  5. भाव पाहुड़: बाहरी क्रियाओं की तुलना में आंतरिक 'भावों' (परिणामों) की शुद्धि पर जोर।
  6. मोक्ष पाहुड़: मुक्ति के मार्ग और मोक्ष के सुख का वर्णन।
  7. लिंग पाहुड़: मुनि के बाह्य और अंतरंग लिंग (स्वरूप) का सूक्ष्म वर्णन।
  8. शील पाहुड़: सदाचार, ब्रह्मचर्य और शील की महिमा।

3. पद्यानुवाद की एक बानगी (Sample Verse)

भावों की प्रधानता को डॉ. साहब ने इन शब्दों में ढाला है:

"बाह्य क्रिया कितनी करे, पर भाव यदि हों अशुद्ध।"
"आत्म-अनुभव के बिना, वह हो न सके कभी बुद्ध ॥"


4. पुस्तक की विशेषताएँ

  • आध्यात्मिक मार्गदर्शिका: यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि बिना आंतरिक शुद्धि के बाहरी तपस्या व्यर्थ है।
  • तार्किक भाषा: डॉ. भारिल्ल ने पद्यानुवाद में कुन्दकुन्ददेव के 'निश्चय' और 'व्यवहार' के सूक्ष्म संतुलन को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।
  • सामूहिक स्वाध्याय: आठों पाहुड़ों को छंदबद्ध रूप में पढ़ने से वैराग्य और तत्व-ज्ञान की गहरी प्रेरणा मिलती है।

5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: प्रवाहमयी, तार्किक और सरल हिंदी (काव्य)।
  • डिजिटल लिंक: यह Jain eBooks और Atma Dharma पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • समयसार अनुशीलन: डॉ. भारिल्ल द्वारा कुन्दकुन्द के प्रमुख ग्रंथ की व्याख्या।
  • कुन्दकुन्द शतक: कुन्दकुन्ददेव की श्रेष्ठ १०० गाथाओं का संकलन।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Paperback

Topics

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