अर्चना - जीवन के आलोक में (Archana - JB)
लेखक/संकलनकर्ता: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर
1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय
'अर्चना' मात्र एक पूजन की पुस्तक नहीं है, बल्कि यह वीतराग भक्ति और अध्यात्म का एक अनूठा संगम है। डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल जी ने इसमें पारम्परिक क्रियाकांडों से हटकर भक्ति को 'आत्म-कल्याण' और 'भेद-विज्ञान' का माध्यम बनाया है।
2. मुख्य सामग्री और विशेषताएँ (Key Highlights)
- भावपूर्ण पूजन: इसमें देव-शास्त्र-गुरु, तीर्थंकरों और सिद्धों की पूजन गाथाएँ शामिल हैं। इन पूजनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनका प्रत्येक शब्द द्रव्यानुयोग (Metaphysics) के सिद्धांतों से ओत-प्रोत है।
- अध्यात्मिक जयमालाएँ: प्रत्येक पूजन के अंत में दी गई जयमालाएँ आत्मा के शुद्ध स्वरूप का चिंतन करने और संसार की असारता को समझने के लिए एक शक्तिशाली 'ध्यान' की तरह कार्य करती हैं।
- सिद्धांतों का समावेश: इसमें 'वस्तु स्वातंत्र्य', 'क्रमबद्ध पर्याय' और 'ज्ञाता-दृष्टा स्वभाव' जैसे गहरे दार्शनिक विषयों को भक्ति के गीतों में पिरोया गया है।
- भाषा और शैली: इसकी भाषा प्रवाहमयी, सरल और संगीतबद्ध है, जिससे इसे सामूहिक रूप से पढ़ना और मनन करना बहुत प्रभावशाली हो जाता है।
- भक्ति से भगवान बनने का मार्ग: डॉ. साहब ने इसमें स्पष्ट किया है कि सच्ची 'अर्चना' वही है जिसमें भक्त, भगवान के गुणों को देखकर अपने भीतर भी उन्हीं गुणों को प्रकट करने का पुरुषार्थ करे।
3. पुस्तक का आध्यात्मिक सार
यह पुस्तक पाठक को यह सिखाती है कि:
"भगवान की पूजा उन्हें प्रसन्न करने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर सोई हुई भगवत्ता (Divinity) को जगाने के लिए की जाती है।"
4. संदर्भ और उपलब्धता
- भाषा: हिंदी और संस्कृत (पद्य और गद्य)।
- उपयोगिता: प्रतिदिन के स्वाध्याय, मंदिर में सामूहिक पूजन और व्यक्तिगत आत्म-चिंतन के लिए।
- डिजिटल लिंक: आप इसे Jain eBooks या Atma Dharma पर खोज सकते हैं।
5. संबंधित कृतियाँ
- जिनपूजन रहस्य: पूजन के पीछे के तर्कों को समझने के लिए।
- स्तुति और भक्ति: विभिन्न स्तोत्रों और स्तुतियों का संकलन।