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Cover of आ. कुन्दकुन्द और उनके पंच परमागम
Dravyanuyog

आ. कुन्दकुन्द और उनके पंच परमागम

Acharya Kundkund Aur Unke Panch Paramagam

by Dr. Hukamchand Bharill

30approx.

* Prices are subject to revision. Delivery fees may vary by location.

Publisher

Pandit Todarmal Smarak Trust

A-4, Bapu Nagar, Jaipur-302015, Rajasthan

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ptstjaipur@yahoo.com Website

Description

आ. कुन्दकुन्द और उनके पंच परमागम (Acharya Kundkund aur Unke Panch Paramagam)

लेखक: डॉ. हुकुमचंद भारिल्ल (Dr. Hukamchand Bharill)
प्रकाशक: पंडित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट (PTST), जयपुर


1. पुस्तक का संक्षिप्त परिचय

यह पुस्तक दिगंबर जैन परंपरा के सर्वाधिक प्रतिष्ठित आचार्य कुन्दकुन्ददेव (प्रथम शताब्दी ई.पू.) और उनके द्वारा रचित पाँच महाग्रंथों—जिन्हें 'पंच परमागम' कहा जाता है—का एक व्यापक परिचय प्रस्तुत करती है। डॉ. भारिल्ल ने इस कृति में कुन्दकुन्द के क्रांतिकारी अध्यात्म और उनकी दार्शनिक विरासत को आधुनिक तर्कों के साथ प्रस्तुत किया है।


2. पंच परमागम का परिचय (The Five Great Treatises)

डॉ. साहब ने इस पुस्तक में निम्नलिखित पाँच ग्रंथों का संक्षिप्त और मर्मस्पर्शी सार दिया है:

  1. समयसार: यह 'शुद्धनय' का ग्रंथ है, जो आत्मा को राग-द्वेष और शरीर से भिन्न केवल एक 'ज्ञायक' (जानने वाला) तत्व सिद्ध करता है।
  2. प्रवचनसार: यह ज्ञान और ज्ञेय का ग्रंथ है, जिसमें केवलज्ञान की महिमा और मुनि धर्म के स्वरूप का वैज्ञानिक वर्णन है।
  3. पंचास्तिकाय: इसमें विश्व की संरचना (६ द्रव्य और ५ अस्तिकाय) का विस्तार से वर्णन है।
  4. नियमसार: यह 'निश्चय रत्नत्रय' का ग्रंथ है, जो आत्मा में लीन होने की वास्तविक विधि (प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान आदि) बताता है।
  5. अष्टपाहुड़: आठ लघु ग्रंथों का संग्रह, जिसमें दर्शन (श्रद्धा), शील और मुनि धर्म की शुद्धि पर जोर दिया गया है।

3. मुख्य विषय और विशेषताएँ (Key Highlights)

  • आचार्य कुन्दकुन्द का जीवन: उनके विदेह क्षेत्र गमन, सीमंधर स्वामी के दर्शन और उनकी प्रामाणिकता पर ऐतिहासिक व आध्यात्मिक शोध।
  • क्रांतिकारी अध्यात्म: डॉ. साहब ने स्पष्ट किया है कि कुन्दकुन्द ने क्रियाकांड के स्थान पर 'स्वभाव' के अवलंबन को धर्म बताया।
  • समन्वय: पाँचों ग्रंथों का आपस में क्या संबंध है और एक मुमुक्षु को किस क्रम में इनका स्वाध्याय करना चाहिए, इसका मार्गदर्शन।
  • तार्किक प्रस्तुति: डॉ. भारिल्ल की विशिष्ट शैली में कुन्दकुन्द के सिद्धांतों को 'वस्तु स्वातंत्र्य' के आलोक में समझाया गया है।

4. पुस्तक का आध्यात्मिक संदेश

डॉ. भारिल्ल इस पुस्तक के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि:

"आचार्य कुन्दकुन्द का मार्ग कोई नया मार्ग नहीं है, बल्कि यह वही प्राचीन मार्ग है जिसे तीर्थंकरों ने बताया। उनके ग्रंथों का सार केवल एक ही है—अपने शुद्ध आत्मा को पहचानना।"


5. संदर्भ और उपलब्धता

  • भाषा: स्पष्ट, तार्किक और गौरवमयी हिंदी।
  • उपयोगिता: जैन दर्शन के विद्यार्थियों, स्वाध्यायियों और कुन्दकुन्द के प्रशंसकों के लिए एक 'कम्पेंडियम' (संग्रह)।
  • डिजिटल लिंक: यह Atma Dharma और Jain eBooks पर उपलब्ध है।

6. संबंधित साहित्य

  • कुन्दकुन्द शतक: पाँचों परमागमों की चुनिंदा १०० गाथाओं का संग्रह।
  • समयसार अनुशीलन: डॉ. भारिल्ल द्वारा समयसार की विस्तृत व्याख्या।
  • युगपुरुष कानजीस्वामी: कुन्दकुन्द के साहित्य को पुनर्जीवित करने वाले महापुरुष का जीवन चरित्र।
Language
Hindi
ISBN
-
Formats
Upcoming

Topics

Tattvagyan